असम के बेदखली अभियान पर बांग्लादेशी नेता को जवाब

असम के बेदखली अभियान पर बांग्लादेशी नेता को जवाब

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वन मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला

गुवाहाटी :

असम के वन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने नगांव जिले के लुटुमारी आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर बांग्लादेश के विपक्षी नेता की टिप्पणियों पर जवाब देते हुए कहा कि अभियान कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चलाया गया। उन्होंने आरोपों को तथ्यों की अधूरी और भ्रामक प्रस्तुति बताते हुए स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य अधिसूचित वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना था, न कि किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना। मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने पक्ष में कानूनी और प्रशासनिक तथ्यों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, लुटुमारी आरक्षित वन में 17 और 18 अक्टूबर को चलाए गए अभियान के दौरान 314 हेक्टेयर अधिसूचित वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया और 563 परिवारों को वहां से हटाया गया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

बरुआ ने कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। उन्होंने 10 फरवरी, 2026 के न्यायालय के आदेश का उल्लेख किया, जिसमें असम के अधिसूचित वन क्षेत्रों से बेदखली के लिए प्रक्रिया संबंधी निर्देश दिए गए थे। मंत्री के मुताबिक, इस मामले में याचिकाकर्ताओं की विशेष अनुमति याचिकाओं (सिविल) का निपटारा भी सुप्रीम कोर्ट ने दो सितंबर, 2026 को कर दिया था। मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को पहले ही पर्याप्त समय दिया गया था। उनके अनुसार, बेदखली से पहले नोटिस जारी किए गए और लोगों को अपने घर खाली करने तथा सामान हटाने का अवसर मिला। सरकार ने बारिश और बाढ़ के मौसम के समाप्त होने के बाद कार्रवाई की, ताकि प्रभावित परिवारों को होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि अभियान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और इस दौरान बल प्रयोग या प्रतिरोध की कोई घटना सामने नहीं आई।

वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर

बरुआ ने कहा कि आरक्षित वन भूमि की सुरक्षा कानूनी जिम्मेदारी होने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके मुताबिक, मुक्त कराई गई भूमि पर स्थानीय प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाने की योजना है। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को बहाल करने, विशेष रूप से हाथियों के लिए उपयुक्त पर्यावास विकसित करने और मानव-हाथी संघर्ष कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बेदखली को लेकर उठे थे सवाल

यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश के विपक्षी नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की ओर से असम में बेदखली अभियान और घरों को गिराए जाने को लेकर चिंता जताए जाने के बाद आई। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मुस्लिम परिवारों को हटाए जाने और कुछ मस्जिदों को गिराए जाने के आरोप भी उठाए थे। असम सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अभियान वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए चलाया गया था। मंत्री ने कहा कि सरकार सभी समुदायों का सम्मान करती है और बेदखली से जुड़ी मानवीय कठिनाइयों को समझती है, लेकिन वन संरक्षण और कानून के पालन को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
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