अरुणाचल के जोरम गांव में पक्षियों की 38 प्रजातियां दर्ज

अरुणाचल के जोरम गांव में पक्षियों की 38 प्रजातियां दर्ज

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संरक्षण और इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के केयी पन्योर जिले के जोरम गांव में आयोजित पहली पक्षी गणना में पक्षियों की 38 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इस पहल से क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता सामने आई है। साथ ही, स्थानीय समुदाय की भागीदारी से पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देने, बर्डवॉचिंग यानी पक्षी दर्शन को लोकप्रिय बनाने और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं भी उजागर हुई हैं।जोरम गांव के जोरम पुतुंग इलाके में पहली बार आयोजित ‘केयी पन्योर बर्ड काउंट’ में विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों, स्वयंसेवकों, स्थानीय प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों की पहचान कर उनकी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया। इस अभ्यास का उद्देश्य स्थानीय पक्षी विविधता का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

हिमालयी क्षेत्र की पक्षी विविधता दर्ज

पक्षी गणना के दौरान दर्ज प्रजातियों में इंडियन व्हाइट-आई, ग्रे बुशचैट, डार्क-साइडेड फ्लाईकैचर, व्हाइट-थ्रोटेड फैंटेल, माउंटेन हॉक-ईगल, लार्ज-बिल्ड क्रो और फायर-ब्रेस्टेड फ्लावरपेकर प्रमुख हैं। इस सूची में छोटे कीटभक्षी पक्षियों से लेकर शिकारी पक्षी माउंटेन हॉक-ईगल तक शामिल हैं।विशेषज्ञों के लिए इस तरह की गणना किसी क्षेत्र में पक्षियों की मौजूदगी और उनके वितरण को समझने का महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दर्ज किसी भी प्रजाति को इस सर्वेक्षण के आधार पर दुर्लभ, संकटग्रस्त या जिले में पहली बार दर्ज की गई प्रजाति घोषित नहीं किया गया है।

कई संस्थाओं ने मिलकर किया आयोजन

इस पक्षी गणना का आयोजन केयी पन्योर टूरिज्म सोसाइटी ने अरुणाचल प्रदेश बर्डिंग क्लब, बर्ड काउंट इंडिया और नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (एनसीएफ) के सहयोग से किया। इस संयुक्त पहल में स्थानीय लोगों की भागीदारी के जरिए पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों के महत्व को समझने तथा संरक्षण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।स्थानीय समुदाय को इस तरह के कार्यक्रमों से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जैव विविधता के संरक्षण में ग्रामीणों और युवाओं की सक्रिय भूमिका हो। स्थानीय स्तर पर पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार और प्राकृतिक आवासों की जानकारी बढ़ने से भविष्य में संरक्षण संबंधी प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।

भविष्य में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं

जोरम में पक्षी गणना को केवल वन्यजीवों की प्रजातियां दर्ज करने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह पहल क्षेत्र में पक्षी दर्शन आधारित पर्यटन विकसित करने की संभावनाओं की ओर भी संकेत करती है। प्राकृतिक वातावरण और पक्षियों की विविधता में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करके स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।इस दिशा में प्रशिक्षित स्थानीय गाइड, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, भोजन और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं। हालांकि, इन अवसरों को वास्तविक आजीविका में बदलने के लिए व्यवस्थित योजना, प्रशिक्षण, प्रचार और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन प्रबंधन की जरूरत होगी।

आगे भी पक्षी सर्वेक्षण की जरूरत

विशेषज्ञों के लिए पहली पक्षी गणना भविष्य के अध्ययन का आधार बन सकती है। अलग-अलग मौसमों में नियमित सर्वेक्षण करने से यह समझने में मदद मिलेगी कि क्षेत्र में पक्षियों की कौन-कौन सी प्रजातियां स्थायी रूप से पाई जाती हैं और किनका आगमन मौसमी होता है। लगातार आंकड़े जुटाने से पक्षियों की संख्या, वितरण और प्राकृतिक आवासों में होने वाले बदलावों की निगरानी भी की जा सकती है।इस गणना में दर्ज 38 प्रजातियां केवल सर्वेक्षण के दौरान पहचानी गई पक्षी विविधता को दर्शाती हैं। यह जरूरी नहीं कि यही क्षेत्र में मौजूद पक्षियों की कुल संख्या हो। भविष्य में अधिक व्यापक और नियमित सर्वेक्षण से केयी पन्योर जिले की जैव विविधता की बेहतर तस्वीर सामने आ सकती है।जोरम में आयोजित यह पहला पक्षी गणना अभियान स्थानीय जैव विविधता के दस्तावेजीकरण, सामुदायिक संरक्षण और प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है।
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