

दिल्ली, इंद्राणी : विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय बजट में पश्चिम बंगाल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए प्रयासरत भाजपा से उम्मीद की जा रही है कि वह बजट के जरिए बंगालवासियों को साधने की कोशिश करेगी। उत्तर बंगाल में बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर राज्य में औद्योगिक निवेश तक, किन योजनाओं के लिए कितनी राशि तय होगी, इस पर सभी दलों की नजर है।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 2025-26 के केंद्रीय बजट में बिहार को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। हवाई अड्डा निर्माण, कृषि सुधार और औद्योगिक ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों में बड़ी राशि दी गई थी। इसी तर्ज पर तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल के लिए भी अधिक आवंटन की मांग उठाई है। तृणमूल का आरोप है कि केंद्र सरकार बंगाल के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। पार्टी का कहना है कि न तो पिछले वर्षों में पर्याप्त वित्तीय सहायता मिली और न ही केंद्र के पास राज्य का बकाया पैसा जारी किया गया। तृणमूल ने बकाया राशि की वापसी और बुनियादी ढांचे के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है।
दूसरी ओर, बंगाल भाजपा नेतृत्व भी इस बजट को लेकर आशान्वित है। केंद्रीय नेतृत्व के अनुसार पश्चिम बंगाल इस बार भाजपा के लिए ‘प्रेस्टिज फाइट’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही राज्य में जनसभाएं शुरू कर चुके हैं। भाजपा को उम्मीद है कि बजट में उत्तर बंगाल के लिए एम्स अस्पताल, बंद चाय बागानों की समस्या का समाधान, बाढ़ नियंत्रण और रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाएं शामिल होंगी। रेल बजट में भी बंगाल को लेकर उम्मीदें हैं। मेट्रो विस्तार, नई वंदे भारत ट्रेनों और लंबी दूरी की नई रेल सेवाओं की घोषणा संभव है। शिक्षा क्षेत्र में नए कॉलेज और विश्वविद्यालय, विशेषकर महिलाओं के लिए अलग विश्वविद्यालय की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि इस बार के बजट आवंटन में पश्चिम बंगाल को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी के लिए राज्य में राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह बात राज्य भाजपा नेतृत्व भी भीतरखाने स्वीकार कर रहा है। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यदि बंगाल की तुलना में असम को अधिक बजटीय आवंटन मिलता है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि केंद्रीय भाजपा की प्राथमिकता में पश्चिम बंगाल नहीं है। ऐसे में राज्य पर राजनीतिक पकड़ मजबूत करने को लेकर केंद्र की मंशा पर सवाल उठेंगे और यह बात कार्यकर्ताओं के बीच भी साफ हो जाएगी। गौरतलब है कि पिछले वर्ष बजट के दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में मधुबनी प्रिंट की साड़ी पहनकर पहुंची थीं। वहीं इस बार एक फरवरी को बजट पेश करते समय उनके पहनावे को लेकर भी राजनीतिक हलकों में खास दिलचस्पी है। सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वह बंगाल की पारंपरिक कांथा स्टिच की साड़ी पहनेंगी या फिर असम की प्रसिद्ध मुगा सिल्क।