

मुंबई: मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर में गंभीर जल संकट को देखते हुए निर्माण स्थलों पर पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मानसून में देरी और झीलों के घटते जलस्तर ने शहर के जल भंडार को संकटपूर्ण स्थिति में पहुंचा दिया है।
16 जून तक मुंबई की झीलों में जल भंडार घटकर केवल 10.35 प्रतिशत रह गया है, जिससे आने वाले दिनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
निर्माण कार्यों में पानी एक अनिवार्य संसाधन होता है, जिसका उपयोग कंक्रीट क्योरिंग, प्लास्टरिंग और अन्य संरचनात्मक कार्यों में किया जाता है। अब जब नगरपालिका आपूर्ति बंद हो गई है, तो डेवलपर्स को निजी टैंकर या पुनर्चक्रित पानी जैसे महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परियोजनाओं की लागत में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है, यदि यह स्थिति कुछ हफ्तों से अधिक समय तक बनी रहती है।
रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, जल संकट लंबे समय तक जारी रहने पर निर्माण कार्य की गति धीमी पड़ सकती है। इससे परियोजनाओं की डिलीवरी में देरी और राजस्व मान्यता (Revenue Recognition) पर भी असर पड़ने की आशंका है।
कुछ अनुमानों के अनुसार, सक्रिय निर्माण परियोजनाओं में EBITDA मार्जिन पर 4 से 5 प्रतिशत तक का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
एक रियल एस्टेट डेवलपर के अनुसार, पानी की अनुपलब्धता के चलते यदि वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग लंबे समय तक करना पड़ा तो कुल परियोजना लागत में उल्लेखनीय वृद्धि तय है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि मानसून जल्दी सक्रिय नहीं हुआ तो लागत और समय दोनों पर दबाव और बढ़ सकता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में अधिक सक्रिय प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता है। इनमें Lodha Developers, Oberoi Realty, Godrej Properties और Sri Lotus Developers जैसे नाम शामिल हैं, जिनकी परियोजनाएं क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं।
यह नया संकट ऐसे समय आया है जब रियल एस्टेट उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में चुनावी अवधि से जुड़े श्रमिक पलायन के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था।
इसके अलावा सीमेंट, टाइल्स और अन्य निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने पहले ही परियोजनाओं की लागत को बढ़ा दिया है। ऐसे में जल संकट ने सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल डेवलपर्स को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा और जलाशयों का स्तर सुधरेगा।
यदि पानी की आपूर्ति प्रतिबंध अगले दो सप्ताह के भीतर हटा लिया जाता है, तो इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। लेकिन यदि संकट 15 दिन से अधिक जारी रहता है, तो लागत बढ़ोतरी, परियोजना में देरी और मुनाफे पर दबाव जैसी स्थितियां और गंभीर हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति निवेशकों के लिए भी एक अहम संकेत है कि मुंबई-केंद्रित रियल एस्टेट कंपनियों की निगरानी अब केवल बिक्री और मांग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जल संसाधन जैसी बुनियादी अवसंरचना भी उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।