

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : सभी औद्योगिक इकाइयों और संबंधित पक्षों को सूचित किया गया है कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 25 के तहत राज्य बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति किसी उद्योग, संचालन, प्रक्रिया, उपचार अथवा निस्तारण प्रणाली की स्थापना नहीं कर सकता, यदि उससे जल स्रोतों, कुओं, सीवर या भूमि में सीवेज अथवा औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह की संभावना हो। इसके अलावा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 21 के अनुसार राज्य बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र में कोई औद्योगिक संयंत्र स्थापित अथवा संचालित नहीं किया जा सकता। इसी के अनुरूप किसी भी औद्योगिक इकाई को स्थापना से पूर्व ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (सीटीई) तथा संचालन प्रारंभ करने से पूर्व ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (सीटीओ) प्राप्त करना अनिवार्य है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इन नियमों का पालन करना आवश्यक बताया गया है। अंडमान एवं निकोबार प्रदूषण नियंत्रण समिति ने पाया है कि द्वीपसमूह में कई औद्योगिक इकाइयां आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना स्थापित और संचालित हो रही हैं, जो संबंधित वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। सभी औद्योगिक उद्यमियों और संबंधित पक्षों को सलाह दी गई है कि वे इकाई स्थापित करने से पहले सीटीई तथा संचालन प्रारंभ करने से पहले सीटीओ अवश्य प्राप्त करें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।