

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम - अंडमान निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अभियान समिति के अध्यक्ष जी. भास्कर ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन से माइल तिलक में मालवाहक वाहनों में ओवरलोडिंग की जांच के लिए वेट ब्रिज स्थापित किए जाने के बाद माल परिवहन चालकों के सामने आ रही कठिनाइयों का समाधान करने का आग्रह किया है।
मुख्य सचिव को लिखे पत्र में भास्कर ने ओवरलोडिंग की जांच के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत माल परिवहन चालकों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ किलोग्राम अतिरिक्त वजन की भी अनुमति नहीं दी जा रही है और चालकों पर कथित रूप से जुर्माना लगाया जा रहा है।
भास्कर ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थिति विशेष रूप से कठिन है, जहां उत्तर और मध्य अंडमान तक माल पहुंचाने में पहले से ही कई चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि एनएच-4 सड़क की हालत खराब है और तर्क दिया कि यदि वाहनों को निर्धारित क्षमता के भीतर ही सख्ती से चलाने की अनिवार्यता होगी, तो इससे परिवहन लागत और बढ़ सकती है तथा अंततः आम जनता के लिए वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि परिवहन सेवाओं की व्यवहार्यता संबंधी समस्याओं के कारण पहले से ही कई लोगों को उत्तर और मध्य अंडमान की यात्रा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है, जिससे आने वाले समय में एक कठिन परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है।
अंडमान निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अभियान समिति के अध्यक्ष ने प्रशासन से आग्रह किया कि द्वीपों के कठिन भौगोलिक क्षेत्र और वर्तमान परिवहन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमों को अधिक व्यावहारिक तरीके से लागू करने पर विचार किया जाए। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि पहले एनएच-4 सड़क की स्थिति में सुधार किया जाना चाहिए और इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड को आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।
भास्कर ने मुख्य सचिव से यह भी अनुरोध किया कि सभी संबंधित पक्षों को शामिल करते हुए एक बैठक बुलाई जाए। इसमें ग्रेन डीलर्स एंड ग्रॉसर्स एसोसिएशन, अंडमान एवं निकोबार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नॉर्थ एंड मिडिल अंडमान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा अन्य संबंधित हितधारकों को शामिल किया जाए, ताकि सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशा जा सके।
इस बीच, उन्होंने अपील की कि मामले पर चर्चा होने और व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाने तक माल परिवहन चालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई को स्थगित रखा जाए।