आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को नहीं समझता अमेरिका : जयशंकर

एशिया सोसाइटी की ओर से आयोजित एक विशेष संवाद में एस. जयशंकर ने रखे विचार
US does not understand India's concerns regarding terrorism: Jaishankar
एशिया सोसाइटी की ओर से आयोजित एक विशेष संवाद में जयशंकर
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न्यूयॉर्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देश से उत्पन्न होने वाला आतंकवाद भारत की प्रमुख चिंताओं में से एक है और यदि नयी दिल्ली के साझेदार इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझते हैं, तो इसका द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ता है। उनका यह बयान अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी के बीच भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के समापन के अवसर पर एशिया सोसाइटी की ओर से आयोजित एक विशेष संवाद में जयशंकर ने भारतीय-अमेरिकी और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों के साथ-साथ नीति विशेषज्ञों को संबोधित किया। जयशंकर ने कहा, दुनिया के कई देशों के अमेरिका के साथ संबंध अधिक कठिन रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए जो बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, वह आतंकवाद का मुद्दा है। हमारा मानना है कि... शायद बहुत कम ऐसे देश हैं, जिन्हें कई दशकों से किसी पड़ोसी देश की ओर से जानबूझकर और सुनियोजित नीति के तहत उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा हमने किया है।

भारत- चीन के संबंध अब पहले से बेहतर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के संबंध कुछ वर्ष पहले की तुलना में अब ‘‘बेहतर’’ हैं और सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान के साथ दोनों देशों के रिश्ते सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2020 के सीमा गतिरोध और उसके बाद लंबे समय तक चले तनाव से द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए थे। इस दौरान व्यापार जारी रहा, लेकिन आधिकारिक संपर्क, वीजा और उड़ानों पर असर पड़ा। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच गतिरोध किसी के हित में नहीं है और तीसरे पक्ष इसका फायदा उठा सकते हैं। अमेरिका-चीन संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति संभव है, लेकिन वे व्यापक रूप से प्रतिस्पर्धा की स्थिति में हैं और उनकी सहमति की भी सीमाएं हैं।

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