भारत की दो और आर्द्राभूमि को मिली रामासर मान्यता

अंतरराष्ट्रीय रामासर दिवस से पहले मान्यता भारत के लिए गौरव – भूपेंद्र यादव
भारत की दो और आर्द्राभूमि को मिली रामासर मान्यता
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सर्जना शर्मा

नयी दिल्ली : विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 से पहले भारत की रामसर सूची में दो नई आर्द्र भूमियों को शामिल कर लिया गया है अब भारत में रामासर आर्द्रभूमियों की संख्या 98 हो गयी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के एटा के पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात में कच्छ के छारी-ढांड को अंतर्राष्ट्रीय रामासर मान्यता दी गयी है। आर्द्रभूमि दिवस हर वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है। मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में ये जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने एक्स हैंडल पर इस बात पर खुशी जतायी है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर नेटवर्क का विस्तार 276% से अधिक हुआ है, जो 2014 में 26 स्थलों से बढ़कर वर्तमान में 98 स्थल हो गया है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बढ़ती संख्या अंतर्राष्ट्रीय मान्यता पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ये दोनों आर्द्रभूमि सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियों का आवास प्रदान करती हैं। इन क्षेत्रों में चिंकारा, भेड़िये, काराकल, रेगिस्तानी बिल्लियाँ और रेगिस्तानी लोमड़ियाँ जैसे वन्यजीवों के साथ-साथ लुप्तप्राय पक्षी भी पाए जाते हैं।

ईरान के रामसर में 1971 में हस्ताक्षरित 'आर्द्रभूमि पर सम्मेलन' (रामसर सम्मेलन) हुआ था । भारत 1 फरवरी 1982 को इसका हिस्सा बना था। विशेष संरक्षण महत्व वाले आर्द्रभूमि क्षेत्रों को अंतर्राष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि क्षेत्रों के रूप में नामित किया जा सकता है ।

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