दिल्ली में ट्यूलिप उत्सव – रंग-बिरंगे फूलों के बिछे हैं गलीचे

इसी सप्ताह ट्यूलिप उत्सव का उद्घाटन हुआ और शहरवासी इन खूबसूरत फूलों की झलक पाने बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
दिल्ली में ट्यूलिप उत्सव – रंग-बिरंगे फूलों के बिछे हैं गलीचे
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सर्जना शर्मा

नई दिल्ली के राजनयिक इलाके में स्थित शांति पथ इन दिनों वसंत के रंगों से सजा हुआ है। मौसम भले ही समय से पहले गर्म हो गया हो, लेकिन लाल, पीले, गुलाबी और बैंगनी ट्यूलिप फूलों ने राजधानी को फिर से बसंती एहसास से भर दिया है। इसी सप्ताह ट्यूलिप उत्सव का उद्घाटन हुआ और शहरवासी इन खूबसूरत फूलों की झलक पाने बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कई लोग इन्हें खरीदकर अपने घर भी ले जा रहे हैं, क्योंकि एनडीएमसी ने शांति पथ के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी बिक्री के लिए गमले सजाए हैं।

भारत के लिए ट्यूलिप भले विदेशी फूल हो, लेकिन लगभग एक दशक पहले एनडीएमसी ने इसे दिल्ली की जलवायु में उगाने का प्रयोग किया था। शुरुआत में केवल 17,000 बल्ब लगाए गए थे और यह प्रयोग सफल रहा। धीरे-धीरे हर वर्ष संख्या बढ़ती गई और इस साल करीब 5,17,500 बल्ब लगाए गए हैं। राजधानी के प्रमुख वीआईपी इलाकों में खिले ये ट्यूलिप राहगीरों का स्वागत करते दिखाई देते हैं। उद्घाटन समारोह में मारिया गेरार्ड्स विशेष अतिथि रहीं। ट्यूलिप आज नीदरलैंड की पहचान बन चुका है। दूतावास परिसर में भी विशेष रूप से ट्यूलिप लगाए गए हैं और विशिष्ट मेहमानों के लिए परिसर खोला गया है।

सदियों पुरानी यात्रा

ट्यूलिप का इतिहास लगभग 11वीं सदी पुराना माना जाता है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत ईरान (प्राचीन फारस) से हुई और 15वीं शताब्दी तक यह तुर्की के क्षेत्र में पहुंच गया, जहां यह बेहद लोकप्रिय हुआ। बाद में यूरोप के राजघरानों ने इसकी सुंदरता से प्रभावित होकर इसे अपने देशों में उगाना शुरू किया। 17वीं सदी में नीदरलैंड में ट्यूलिप की दीवानगी इतनी बढ़ी कि इसकी कीमतें आसमान छूने लगीं—इतनी कि एक ट्यूलिप बल्ब की कीमत में घर खरीदा जा सकता था। यह फूल विलासिता और समृद्धि का प्रतीक बन गया।

प्रकृति का अनोखा चक्र

प्राकृतिक आवास में ट्यूलिप समशीतोष्ण जलवायु वाले घास के मैदानों और पहाड़ी क्षेत्रों में पनपता है। वसंत में खिलने के बाद गर्मियों में इसकी पत्तियां और फूल सूख जाते हैं और पौधा भूमिगत कंद के रूप में निष्क्रिय हो जाता है। अगली वसंत ऋतु में यही कंद फिर नई कोंपल बनकर जीवन पाता है। सजावटी पौधा होने के साथ-साथ यह कट-फ्लावर के रूप में भी विश्वभर में अत्यंत लोकप्रिय है।

आज ट्यूलिप की 75 से अधिक किस्में दुनिया भर में उगाई जाती हैं और अब दिल्लीवासी भी साल भर इसके खिलने का इंतजार करते हैं। जब राजधानी की सड़कों पर ये रंगीन कालीन बिछते हैं, तो लोग न केवल इन्हें देखने आते हैं बल्कि शांति पथ के आसपास पिकनिक मनाकर इस प्राकृतिक उत्सव का आनंद भी लेते हैं।

ट्यूलिप केवल एक फूल नहीं, बल्कि इतिहास, कला, अर्थव्यवस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है—जो हर वसंत नई ऊर्जा और रंगों के साथ फिर से जीवंत हो उठता है।

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