टीएसजी भास्कर ने प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय विनियमन का किया विरोध

कांग्रेस ने उपराज्यपाल को सौंपा विरोध का ज्ञापन
टीएसजी भास्कर ने प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय विनियमन का किया विरोध
Published on

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रदेश कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने माननीय उपराज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए प्रस्तावित अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह निजी विश्वविद्यालय विनियमन, 2026 पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अपने ज्ञापन में श्री भास्कर ने कहा कि प्रस्तावित कानून ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा आम जनता के बीच व्यापक चिंता और असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि द्वीपवासियों की वर्षों पुरानी मांग हमेशा से एक ऐसे केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना रही है, जो गुणवत्तापूर्ण, किफायती और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण के बजाय सरकार को केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना पर प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि अंडमान एवं निकोबार के छात्र पिछले लगभग दो महीनों से प्रस्तावित डीम्ड यूनिवर्सिटी के विरोध में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान आम जनता के सहयोग से व्यापक स्तर पर अंडमान बंद आयोजित किया गया तथा विभिन्न स्थानों पर कैंडल मार्च और शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किए गए। ऐसे समय में जनता और छात्रों की चिंताओं का समाधान किए बिना निजी विश्वविद्यालय विनियमन लाना लोगों के आक्रोश को और अधिक बढ़ाने वाला कदम साबित हुआ है। भास्कर ने आगे कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा चलाया गया आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था की कई गंभीर कमियों को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन-ज़ेड, अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर आवाज उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है और यदि उनकी मांगों की अनदेखी की जाती है तो ऐसे आंदोलन आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने बिना किसी व्यवहार्यता अध्ययन, संभावित छात्र नामांकन के आंकड़ों, प्रस्तावित शुल्क संरचना, वित्तीय प्रायोजकों तथा अन्य आवश्यक विवरण सार्वजनिक किए बिना निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की आवश्यकता क्यों महसूस की। उन्होंने सरकारी महाविद्यालयों के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक भूमिका की संभावनाओं को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। ज्ञापन में यह मांग भी की गई कि अंडमान एवं निकोबार के सरकारी महाविद्यालयों को पुनः पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाए। साथ ही प्रस्तावित विनियमन पर व्यापक जनपरामर्श आयोजित किया जाए तथा इस पर आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा को भी बढ़ाया जाए ताकि सभी संबंधित पक्ष अपनी राय उचित रूप से प्रस्तुत कर सकें।

भास्कर ने प्रशासन से आग्रह किया कि जब तक सभी संबंधित अध्ययन, नीतिगत दस्तावेज और रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर दिए जाते तथा व्यापक स्तर पर परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय विनियमन को स्थगित रखा जाए। उन्होंने दोहराया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की शैक्षणिक और विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना ही सबसे उपयुक्त और दीर्घकालिक समाधान है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रस्तावित विनियमन पर कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रशासन द्वीपवासियों, छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगा।


Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in