

अगरतला: त्रिपुरा में हथियार डाल चुके उग्रवादी संगठनों की ओर से त्रिपक्षीय शांति समझौते को लागू करने सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर बुलाई गई 72 घंटे की हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को राज्य में जनजीवन प्रभावित रहा। हड़ताल के कारण कई इलाकों में सड़क यातायात बाधित हुआ, जबकि प्रदर्शनकारियों के रेल पटरियों पर बैठने से लंबी दूरी की ट्रेनों समेत कई रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) को कई ट्रेनों को आंशिक या पूरी तरह रद्द करने और कुछ ट्रेनों के समय में बदलाव करना पड़ा।पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हथियार डाल चुके सैकड़ों उग्रवादियों ने ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ के बैनर तले पश्चिम त्रिपुरा जिले के हतईकोतोर, ब्रिगुदासबारी और खोवाई चौमुहानी में सड़कें अवरुद्ध कर दीं। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न स्थानों पर सड़कों पर धरना दिया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
रेल पटरियों पर बैठे प्रदर्शनकारी
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पश्चिम त्रिपुरा के ब्रिगुदासबारी इलाके में देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारी रेल पटरियों पर बैठ गए। इसके बाद रेल प्रशासन को कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव करना पड़ा। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए कुछ ट्रेनों को पूरी तरह रद्द किया गया, जबकि कई अन्य ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द करने या उनके समय में बदलाव करने का निर्णय लिया गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हड़ताल के कारण ट्रेन सेवाओं और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन राज्य में स्थिति फिलहाल शांतिपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रहा है और यातायात सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
असम-अगरतला राजमार्ग पर यातायात ठप
त्रिपुरा की जीवनरेखा माने जाने वाले असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी हड़ताल का व्यापक असर पड़ा। हतईकोतोर में प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क अवरुद्ध किए जाने के कारण बड़ी संख्या में वाहन फंस गए। इस मार्ग के जरिए त्रिपुरा का संपर्क असम और देश के अन्य हिस्सों से बना रहता है। सड़क यातायात प्रभावित होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और यात्रियों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका पैदा हुई।
2024 के शांति समझौते को लागू करने की मांग
‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ सात हथियार डाल चुके उग्रवादी संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है। कमेटी ने 2024 में केंद्र, राज्य सरकार और संबंधित संगठनों के बीच हुए त्रिपक्षीय शांति समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार से 72 घंटे की हड़ताल शुरू की थी। इस समझौते के तहत उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के समक्ष हथियार डालकर हिंसा का रास्ता छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने की प्रतिबद्धता जताई थी। अब कमेटी का आरोप है कि समझौते में किए गए वादों को अपेक्षित गति से लागू नहीं किया गया है। इन्हीं मांगों को लेकर संगठन आंदोलन पर उतर आया है।
सरकार ने समयबद्ध क्रियान्वयन का दिया भरोसा
पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी विशाल कुमार ने शुक्रवार को हतईकोतोर में कमेटी के नेताओं के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि प्रशासन ने शांति समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है। उन्होंने कहा कि कमेटी की ओर से कुछ मांगें रखी गई हैं और सरकार उन पर काम करने के लिए तैयार है। जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार शांति समझौते को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, कमेटी के नेताओं ने सरकार की ओर से दिए गए प्रस्तावों पर अपने कैडरों के साथ चर्चा करने की बात कही है। इसके बाद वे जल्द से जल्द प्रशासन को अपने निर्णय से अवगत कराएंगे।
11 सूत्री मांगों में भूमि अधिकार और मुकदमे वापस लेने की मांग
कमेटी की 11 सूत्री मांगों में त्रिपुरा के मूल निवासियों के लिए भूमि अधिकार सुनिश्चित करना प्रमुख मांगों में शामिल है। इसके अलावा हथियार डाल चुके उग्रवादियों के खिलाफ लंबित मामलों को वापस लेने की मांग भी की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए शांति समझौते में किए गए प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उनका जोर पुनर्वास, रोजगार, भूमि और कानूनी मामलों से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत पर टिकी नजर
हड़ताल के दूसरे दिन भी सड़क और रेल यातायात प्रभावित रहने के बीच अब सबकी नजर सरकार और कमेटी के बीच जारी बातचीत पर है। प्रशासन ने जहां समझौते के प्रावधानों को समयबद्ध ढंग से लागू करने का भरोसा दिया है, वहीं कमेटी अपने कैडरों से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय करेगी। ऐसे में बातचीत से समाधान निकलता है या हड़ताल के बाद आंदोलन आगे बढ़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।