स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेगी तृणमूल कांग्रेस

तृणमूल का दांव: लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष के पाले में खड़ी हुईं ममता बनर्जी
स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेगी तृणमूल कांग्रेस
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अंजलि भाटिया

नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में एक नया मोड़ सामने आया है। अब तक दूरी बनाए रखने की रणनीति अपनाने वाली तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए जा रहे पद से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करने का संकेत दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी के निर्देश पर तृणमूल सांसद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने और मतदान के समय इसके पक्ष में खड़े होने की तैयारी में हैं। पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल के इस रुख को राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है और इसी दौरान लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर बहस और संभावित मतदान की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस के तीन सांसद—मोहम्मद जावेद, कदिकुन्निल सुरेश और मल्लू रवि—ने पेश किया है। उनका आरोप है कि अध्यक्ष के रूप में ओम बिड़ला संसद की निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहे हैं और कई मौकों पर सत्तारूढ़ पक्ष के प्रति झुकाव दिखाया है। विपक्ष का कहना है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई सांसदों को महत्वपूर्ण बहसों में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, जबकि जनहित के मुद्दे उठाने पर विपक्षी सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

विपक्षी दलों का यह भी आरोप है कि हाल के महीनों में संसद के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में असंतुलन दिखाई दिया है। उनके मुताबिक, बहस के दौरान आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि सत्तारूढ़ दल के सदस्यों की विवादित टिप्पणियों के मामलों में समान कठोरता नहीं दिखाई गई। विपक्ष का तर्क है कि ऐसी घटनाएं संसद की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर सवाल खड़े करती हैं।

इसी पृष्ठभूमि में लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कदिकुन्निल सुरेश ने 10 फरवरी को लोकसभा सचिवालय में अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव का नोटिस दिया था। इस नोटिस पर समाजवादी पार्टी, डीएमके, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद) सहित कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। हालांकि शुरुआती सूची में तृणमूल कांग्रेस के किसी सांसद का नाम शामिल नहीं था। उस समय लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि तृणमूल इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती और पूरे घटनाक्रम को समय देकर देखना चाहती है।

अब तृणमूल के भीतर से मिल रहे संकेत बताते हैं कि पार्टी ने अपना रुख बदल लिया है। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के निर्देश के बाद तृणमूल सांसद न केवल प्रस्ताव का समर्थन करेंगे, बल्कि संभावित मतदान में भी इसके पक्ष में खड़े होंगे।

संवैधानिक प्रावधानों के तहत लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए प्रस्ताव लाया जा सकता है, लेकिन इसे पारित कराने के लिए सदन में बहुमत का समर्थन आवश्यक होता है। मौजूदा लोकसभा की संख्यात्मक स्थिति को देखते हुए इसके पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। इसके बावजूद विपक्ष इस प्रस्ताव को एक राजनीतिक संदेश और अपनी एकजुटता की परीक्षा के रूप में देख रहा है। संसदीय परंपरा के अनुसार जब तक यह प्रस्ताव विचाराधीन रहेगा, तब तक लोकसभा अध्यक्ष स्वयं सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे और उनकी जगह उपाध्यक्ष या राष्ट्रपति द्वारा नामित कोई सदस्य सदन का संचालन करेगा।

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