व्यापार समझौते में अमेरिका का पलड़ा भारी, भारत के हितों की अनदेखी : जयराम रमेश

पार्टी का कहना है कि जारी संयुक्त बयान से साफ है कि इस समझौते में अमेरिका भारत पर भारी पड़ गया है और इसका नुकसान किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को उठाना पड़ेगा।
व्यापार समझौते में अमेरिका का पलड़ा भारी, भारत के हितों की अनदेखी : जयराम रमेश
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अंजलि भाटिया

नई दिल्ली : अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जारी संयुक्त बयान से साफ है कि इस समझौते में अमेरिका भारत पर भारी पड़ गया है और इसका नुकसान किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को उठाना पड़ेगा। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि संयुक्त बयान में कई अहम पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, अब तक सामने आई बातों से यह संकेत मिलता है कि भारत के हितों को नजरअंदाज किया गया है और समझौते का सबसे बड़ा फायदा अमेरिका को मिलेगा।

रमेश ने दावा किया कि इस समझौते के बाद भारत रूस से तेल आयात बंद कर सकता है। साथ ही अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है, तो उस पर फिर से 25 प्रतिशत कर लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए भारत को आयात शुल्कों में भारी कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा।

रमेश ने कहा समझौते के बाद अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात तीन गुना तक बढ़ सकता है। इससे वस्तु व्यापार में भारत का लंबे समय से बना सरप्लस खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के आईटी और सेवा क्षेत्र के निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, जबकि भारतीय वस्तु निर्यातकों को पहले से ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

रमेश ने कहा

“इतनी झप्पियों और फोटो-ऑप्स का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ‘नमस्ते ट्रंप’ और ‘हाउडी मोदी’ पर भारी पड़ गया। दोस्त, दोस्त न रहा।”

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