दक्षिण अंडमान जिला प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों से 7,000 वर्गमीटर सरकारी भूमि मुक्त कराई

दक्षिण अंडमान जिला प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों से 7,000 वर्गमीटर सरकारी भूमि मुक्त कराई
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और सरकारी भूमि के विधिसम्मत उपयोग को सुनिश्चित करने के अपने सतत प्रयासों के तहत दक्षिण अंडमान जिला प्रशासन ने जिले भर में अवैध कब्जों और अतिक्रमणों के विरुद्ध अभियान को और तेज कर दिया है। इस पहल के अंतर्गत अतिक्रमणों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए नियमित निगरानी और कड़ी सतर्कता बरती जा रही है, ताकि मूल्यवान सरकारी भूमि को पुनः सार्वजनिक उपयोग और भविष्य की विकासात्मक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इसी क्रम में आज नयाशहर गांव में एक बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पुलिस विभाग के सहयोग से अवैध रूप से निर्मित किए जा रहे एक आरसीसी ढांचे को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों की सहायता ली गई। अतिक्रमण हटाने वाली टीम ने अभियान के दौरान अन्य कई प्रकार के अवैध कब्जों को भी हटाया, जिनमें गैरकानूनी भूमि प्लॉटिंग गतिविधियां भी शामिल थीं। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से लगाए गए लगभग 50 सीमेंट के सीमा स्तंभों को भी तोड़कर हटा दिया गया। इस अभियान के परिणामस्वरूप लगभग 7,000 वर्गमीटर सरकारी भूमि को सफलतापूर्वक अतिक्रमणमुक्त कराकर पुनः सरकारी खाते में दर्ज किया गया। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार के अनधिकृत कब्जे से दूर रहें, क्योंकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जनसहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दक्षिण अंडमान जिला प्रशासन ने अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण की सूचना देने के लिए विभिन्न माध्यम उपलब्ध कराए हैं। नागरिक जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर 03192-240127, 238881 तथा 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त व्हाट्सएप नंबर 9531888844 पर भी जानकारी साझा की जा सकती है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्राप्त सभी सूचनाओं को पूर्ण गोपनीयता के साथ संभाला जाएगा और सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान सुरक्षित रखी जाएगी। जिला प्रशासन ने कहा है कि आने वाले दिनों में भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा, जिससे सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उसका उपयोग जनहित तथा विकास कार्यों के लिए किया जा सके।


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