8 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, कांग्रेस सड़क पर

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए 8 जनवरी से देशव्यापी आंदोलन ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करने की घोषणा की है।
8 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, कांग्रेस सड़क पर
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अंजलि भाटिया

नई दिल्ली : कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए 8 जनवरी से देशव्यापी आंदोलन ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को समाप्त करने की मंशा से उसकी जगह नया ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम लागू किया है, जो रोजगार की गारंटी नहीं बल्कि योजनाओं के केंद्रीकरण का रास्ता खोलता है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस तीन-चरणीय आंदोलन की रूपरेखा पेश की। उन्होंने बताया कि यह अभियान 8 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा और गांव, पंचायत, प्रखंड, जिला, विधानसभा से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

तीन चरणों में चलेगा आंदोलन

वेणुगोपाल के अनुसार, अभियान के पहले चरण की शुरुआत 8 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) कार्यालयों में तैयारी बैठकों से होगी। 10 जनवरी को जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) कार्यालयों में जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएंगी। इसके बाद 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों पर महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास एक दिन का उपवास रखा जाएगा।

दूसरे चरण में 12 से 30 जनवरी के बीच देश भर की ग्राम पंचायतों में पंचायत-स्तरीय चौपालें आयोजित होंगी। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष का पत्र गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पंपलेट वितरण भी किया जाएगा। 30 जनवरी, शहीद दिवस पर मनरेगा मजदूरों के साथ वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।

तीसरे चरण की शुरुआत 31 जनवरी से होगी। 6 फरवरी तक जिला कलेक्टर/जिलाधिकारी कार्यालयों के सामने धरना दिया जाएगा। इसके बाद 7 से 15 फरवरी के बीच विधानसभा भवनों का राज्य-स्तरीय घेराव किया जाएगा, जबकि 16 से 25 फरवरी के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में चार बड़ी जोनल एआईसीसी रैलियां आयोजित की जाएंगी।

केंद्र पर गंभीर आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नया कानून मनरेगा को कमजोर करने के लिए लाया गया है। वेणुगोपाल ने कहा कि कोविड महामारी और अन्य संकटों के समय मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुआ था, लेकिन अब केंद्र सरकार इसे खत्म करने पर आमादा है।

उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून में कार्य दिवस 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि केंद्र सरकार ने अपने हिस्से के फंड का अनुपात 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया है, जिससे यह दावा खोखला साबित होता है।

‘गांधी का नाम हटाना निंदनीय’

जयराम रमेश ने कहा कि नया अधिनियम पूरी तरह केंद्रीकरण पर आधारित है और इसमें रोजगार की कोई ठोस गारंटी नहीं है। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस कानून को न्यायालय में भी चुनौती देगी।

वेणुगोपाल ने महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को “सबसे निंदनीय” कदम बताया। उन्होंने कहा कि गांधी केवल एक नाम या प्रतीक नहीं हैं, बल्कि श्रम की गरिमा, ग्राम स्वशासन और राज्य की नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक हैं। उनका नाम हटाना दरअसल अधिकार-आधारित रोजगार व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश है।

विपक्ष और संगठनों से भी संपर्क

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल पार्टी तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों को भी इससे जोड़ा जाएगा। जयराम रमेश ने दावा किया कि यह संघर्ष उसी तरह निर्णायक होगा, जैसे तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद सरकार को कानून वापस लेने पड़े थे।

कांग्रेस की मांग है कि VB–G RAM G अधिनियम को तत्काल वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके मूल, अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए, ताकि ग्रामीण गरीबों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और मजदूरों के काम के अधिकार की रक्षा हो सके।

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