अमेरिका- ईरान में संघर्ष भड़कने से बड़े युद्ध का खतरा गहराया

मध्य- पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका
The risk of a major war has intensified following the flare-up of conflict between the US and Iran
दक्षिणी लेबनान के नबातिह से कफ़रतिबनित गाँव पर इज़राइल के नियंत्रित धमाके के बाद उठता धुआँ
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वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में एक बार फिर तेजी आ गई है। ईरानी सेना ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए हैं। यह कार्रवाई पश्चिम एशिया में लगभग एक सप्ताह की शांति के बाद फिर शुरू हुई सैन्य झड़पों के बीच हुई है। इससे पहले मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत अभी भी जारी है। हालांकि, इसी दौरान अमेरिका ने जॉर्डन में अपने ठिकानों पर हुए कथित हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ भारी सैन्य कार्रवाई की थी।

संघर्ष में कई देश हुए शामिल

पिछले दो दिनों में पश्चिम एशिया संकट का दायरा बढ़ गया है। सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के खिलाफ अमेरिका के साथ मिलकर हमले किए हैं। मिस्र भी पहली बार इस संघर्ष की चपेट में आया है, जहां भूमध्यसागरीय बंदरगाह पर ड्रोन हमला हुआ। इसके बाद मिस्र के राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय संघर्ष गंभीर रूप से बढ़ सकता है। वहीं, सऊदी अरब ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए 14 क्षेत्रीय देशों के साथ एक समुद्री रक्षा गठबंधन बनाने की घोषणा की है।

लेबनान में ब्यूफोर्ट किले के पास जोरदार विस्फोट

दक्षिणी लेबनान में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ब्यूफोर्ट किले के पास इजरायली सेना ने रात में कई शक्तिशाली विस्फोट किए हैं। ये विस्फोट आधी रात के आसपास किए गए, जिनकी आवाज काफी दूर तक सुनाई दी और आसपास के गांवों में कई इमारतों के शीशे टूट गए। इजरायल ने कहा है कि उसने ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह द्वारा इस्तेमाल की जा रही सुरंगों को नष्ट करने के लिए यह कार्रवाई की। ब्यूफोर्ट किला को यूनेस्को की खतरे में पड़ी विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।

सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में एक वोट से गिरा

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में एक वोट से गिर गया है। वोटिंग में इसके पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े। ट्रम्प की पार्टी के एक सांसद डेव मैककॉर्मिक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान पर हमलों से पहले संसद की मंजूरी लेना जरूरी हो जाता। यानी राष्ट्रपति खुद यह फैसला नहीं ले सकते थे। ईरान जंग को लेकर विपक्षी सांसद मांग कर रहे हैं कि ऐसे किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम फैसला संसद ही ले। ताजा घटनाक्रम के बाद इसे सीनेट में लाने के लिए दोबारा कोशिश करनी होगी। सैन्य कार्रवाई रोकने का विधेयक फिलहाल अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी कमेटी के पास है।

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