ग्राम पंचायत हरिनगर के प्रधान ने एक्वाकल्चर मुद्दों को उठाया

किसानों की आजीविका बढ़ाने हेतु मुख्यभूमि से मछली बीज की मांग
ग्राम पंचायत हरिनगर के प्रधान ने एक्वाकल्चर मुद्दों को उठाया
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : क्षेत्र में मत्स्य किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्राम पंचायत हरिनगर के प्रधान मनोजीत हलदर ने 30 अप्रैल को मत्स्य, कृषि एवं पशुपालन तथा पशु चिकित्सा सेवाओं की सचिव पल्लवी सरकार, आईएएस के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में एक्वाकल्चर क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की गई तथा उच्च उत्पादन वाली मत्स्य पालन प्रणाली को पुनर्जीवित करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के दौरान मुख्य मुद्दा मुख्यभूमि से मीठे पानी की मछलियों के बीज की शीघ्र आपूर्ति की आवश्यकता का रहा। हलदर ने बताया कि लगभग एक दशक पूर्व मत्स्य विभाग द्वारा किसानों को गोल्डा (झींगा), रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रजातियों के मुख्यभूमि से लाए गए बीज उपलब्ध कराए जाते थे, जो अपनी उत्कृष्ट वृद्धि क्षमता के लिए जाने जाते थे और एक वर्ष में 4 से 5 किलोग्राम तक बढ़ जाते थे, जिससे किसानों को काफी लाभ होता था। हालांकि हाल के वर्षों में स्थानीय स्तर पर उत्पादित बीजों की ओर बदलाव के कारण उत्पादकता में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्रधान के अनुसार ये स्थानीय प्रजातियां सामान्यतः एक वर्ष में केवल 0.5 से 1 किलोग्राम तक ही बढ़ पाती हैं, जिससे उत्पादन घट रहा है और मत्स्य पालन पर निर्भर किसानों की आय में कमी आ रही है। मनोजीत हलदर ने सचिव को अवगत कराया कि ग्राम पंचायत हरिनगर में वर्तमान में लगभग 300 से 350 सक्रिय मत्स्य पालन तालाब हैं, जिससे यह क्षेत्र अनेक परिवारों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उच्च वृद्धि वाली मुख्यभूमि के बीजों की पुनः आपूर्ति से इस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ेगा, लाभप्रदता में सुधार होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। पल्लवी सरकार, आईएएस ने उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि विभाग इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यभूमि से मछली बीज की आपूर्ति की संभावनाओं का परीक्षण करेगा। मत्स्य क्षेत्र के अलावा श्री मनोजीत हलदर ने हरिनगर ग्राम पंचायत से संबंधित कृषि एवं पशु चिकित्सा विभाग के अन्य विकासात्मक मुद्दों पर भी चर्चा की। बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई, जिसमें प्रधान ने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग द्वारा समय पर हस्तक्षेप से क्षेत्र के सैकड़ों मत्स्य किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।


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