

संसद के आगामी मॉनसून सत्र को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का यह ऐलान देश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद तय हुआ यह सत्र इस बार कई मायनों में हंगामेदार और ऐतिहासिक होने की उम्मीद है। लगभग चार हफ्ते चलने वाले इस सत्र में कुल 19 से 20 बैठकें होने की संभावना है, जहां राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा और विधायी कार्य निपटाए जाएंगे।
किरन रिजिजू ने दी जानकारीः
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत सरकार की सिफारिश को स्वीकार करते हुए संसद का मॉनसून सत्र 2026 बुलाने की मंजूरी दे दी है। आगामी 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस सत्र में देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा, बहस और अहम फैसले लिए जाएंगे।
संसद में बदलेगा विपक्षी खेमे का भूगोल:
इस मॉनसून सत्र पर TMC और शिवसेना (UBT) में हुई हालिया टूट की गहरी छाया रहेगी। दोनों पार्टियों के बागी सांसदों (TMC के 20 और शिवसेना-UBT के 6) को अलग गुट के तौर पर मान्यता मिलेगी या नहीं, इस पर स्पीकर ओम बिरला का निर्णय आना शेष है। वहीं, राज्यसभा की तस्वीर भी बदल चुकी है; नवनिर्वाचित सांसदों के आने के बाद ऊपरी सदन का संख्या बल अब पूरी तरह शासक दल (NDA) के पाले में झुक गया है।
संसद में आ सकते हैं दो बड़े संविधान संशोधन विधेयक:
इस मॉनसून सत्र में सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े '131वें संविधान संशोधन विधेयक' को दोबारा पेश कर सकती है। अप्रैल में खारिज हो चुके इस बिल में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नए प्रावधान के तहत, सरकार लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या को 50 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव इसी बिल के भीतर शामिल कर सकती है।
सत्र में आ सकते हैं कई अन्य महत्वपूर्ण कानून:
इस मॉनसून सत्र में सरकार कुछ और बड़े कानून (विधेयक) भी ला सकती है। इनमें सबसे चर्चा में रहने वाला 130वां संविधान संशोधन बिल है, जिसके तहत यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहता है, तो उसे अपना पद छोड़ना होगा। इस बिल पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) कुछ बदलावों की सिफारिश कर सकती है, जैसे—यह साफ करना कि किन विशिष्ट अपराधों में कुर्सी जाएगी और इस कानून के गलत इस्तेमाल को कैसे रोका जाए।
इसके अलावा, सरकार 'एक देश एक चुनाव बिल' को पास कराने पर पूरा जोर देगी। साथ ही, विदेशों से मिलने वाले फंड (FCRA बिल), शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए 'विक विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल', और खेल जगत के लिए 'एंटी डोपिंग बिल' भी पेश किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने, कर्मचारियों की सैलरी (कोड ऑन वेजेस) और बिजनेस व शेयर मार्केट से जुड़े कई अन्य जरूरी बिल भी इस सत्र की लिस्ट में शामिल हैं।