

दिल्ली सरकार ने राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अगले तीन साल में 32,000 ईवी चार्जिंग प्वॉइंट स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 127 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता मिलेगी। यह लक्ष्य 2028 तक पूरा करने की योजना है।
इस योजना को लागू करने के लिए दिल्ली ट्रांस्को लिमिटेड (DTL) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। पहले चरण में सरकारी इमारतों, दफ्तरों, दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग स्थलों को चिन्हित किया जा रहा है। दूसरे चरण में कॉलोनियों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी से चार्जिंग प्वॉइंट लगाए जाएंगे।
राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2026 में अब तक 41,000 से अधिक ईवी रजिस्टर्ड हो चुके हैं, जो कुल वाहनों का लगभग 10% हैं। अप्रैल, मई और जून में ही बड़ी संख्या में ईवी रजिस्ट्रेशन हुए हैं। फिलहाल दिल्ली में 8,900 से ज्यादा चार्जिंग प्वॉइंट और सैकड़ों बैटरी स्वैपिंग स्टेशन मौजूद हैं।
नई EV पॉलिसी 2.0 के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और आसान बनाने की योजना है। इसके लिए एक डिजिटल पोर्टल बनाया जाएगा, जहां से चार्जिंग स्टेशन से जुड़े सभी काम एक ही जगह से पूरे हो सकेंगे। साथ ही, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में तेजी से चार्जिंग प्वॉइंट लगाए जा सकें।
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन एक किफायती विकल्प बनते जा रहे हैं। हालांकि, चार्जिंग की सुविधा की कमी लोगों के लिए बड़ी चिंता रही है। अगर 32,000 चार्जिंग प्वॉइंट का लक्ष्य पूरा होता है, तो दिल्ली में हर कुछ दूरी पर चार्जिंग सुविधा उपलब्ध होगी। इससे न सिर्फ ईवी खरीद बढ़ेगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी।
यह पहल राजधानी में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी, जिससे दिल्ली को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद है।