

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व केवल संविधान में दर्ज शब्द नहीं, बल्कि बलिदान, संघर्ष और पीढ़ियों की तपस्या से उपजे जीवंत वादे हैं। इन्हीं मूल्यों के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राण न्योछावर किए और आज हम सब पर इन्हें कर्म में उतारने की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में गणतंत्र दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का क्षण भी है। अभिषेक बनर्जी ने चिंता जताई कि संविधान को एक झटके में नहीं, बल्कि “कई खामोश प्रहारों” से कमजोर किया जा रहा है। उनका कहना था कि लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संस्थाओं के प्रति भय का माहौल बन रहा है और समाज के कई वर्गों को हाशिये पर धकेला जा रहा है।
भाषा, भोजन, आस्था, प्रेम और विश्वास जैसी बुनियादी स्वतंत्रताओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि गणतंत्र सत्ता की दया से नहीं, बल्कि नागरिकों की रोजमर्रा की पसंद और संघर्ष से जीवित रहता है। अंत में उन्होंने देशवासियों से अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने, सच बोलने और संविधान के मूल वादों को जीवित रखने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।