

नई दिल्ली: लंबी कतारें, भीड़ से भरे जनरल डिब्बे और त्योहारों में सीट के लिए जद्दोजहद—भारतीय रेल की यह तस्वीर अब धीरे-धीरे बदलने जा रही है। आम यात्रियों को फिर से रेलवे की प्राथमिकता के केंद्र में लाने के लिए भारतीय रेल ने बड़ा और ठोस रोडमैप तैयार किया है। आधुनिक जनरल और नॉन-एसी कोचों का रिकॉर्ड उत्पादन हो, भीड़ संभालने के लिए हजारों विशेष ट्रेनें या फिर सुरक्षा और टिकटिंग व्यवस्था में सख्ती—रेलवे हर मोर्चे पर बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारतीय रेल ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर जनरल और नॉन-एसी कोचों का निर्माण किया है, ताकि कम किराए में ज्यादा यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 4,838 नए एलएचबी जनरल और नॉन-एसी कोच तैयार किए जा रहे हैं, जबकि 2026-27 में 4,802 नए कोच बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और आम यात्रियों को राहत मिलेगी।
त्योहारों और सीजनल भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 2025 में रिकॉर्ड 43 हजार से ज्यादा विशेष ट्रेनें चलाईं। महाकुंभ, छठ पूजा, होली और गर्मी के मौसम में चलाई गई इन ट्रेनों से भीड़ का दबाव कम हुआ और यात्रियों को समय पर सफर की सुविधा मिल सकी। स्टेशनों पर अव्यवस्था और धक्का-मुक्की रोकने के लिए 76 बड़े स्टेशनों पर यात्री होल्डिंग एरिया बनाए जा रहे हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बने यात्री सुविधा केंद्र की तरह यहां भी यात्रियों को बैठने, टिकट, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।
टिकट दलालों पर नकेल कसने के लिए तत्काल टिकट बुकिंग में आधार सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। रेलवे ने अब तक 5.73 करोड़ संदिग्ध और फर्जी आईआरसीटीसी खातों को बंद या निलंबित किया है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी रेलवे ने बड़ा निवेश किया है। सुरक्षा बजट बढ़ाकर 1.16 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसका असर यह है कि रेल दुर्घटनाओं की संख्या में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। अमृत भारत जैसी पूरी तरह नॉन-एसी ट्रेनों और नमो भारत सेवाओं से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत हो रही है। साफ है—भारतीय रेल अब आम यात्री के भरोसे को फिर से मजबूत करने की राह पर है।