

नयी दिल्ली : पहली से आठवीं कक्षा के वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने के मुद्दे पर शनिवार को दिल्ली में शिक्षकों ने रैली की । दिल्ली के रामलीला मैदान में टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया यूपी की अध्यक्षता में देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपना विरोध जताया। शिक्षकों ने सरकार ने इस मामले में दखल की मांग की है। उधर, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने इस मुद्दे पर 13 अप्रैल को देश के सभी जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन देने का ऐलान किया है।
टीचर फेडरेशनल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा, आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी उत्तीर्ण की अनिवार्यता थोपा जाना गलत है। ऐसे शिक्षकों को दो साल में टीईटी उत्तीर्ण अनिवार्य किया गया है। लंबे समय से सेवाएं देने के बाद अचानक एक फैसले से उनकी पढ़ाने की काबलियत पर सवाल उठाया है। जबकि समय-समय पर प्रदेश शिक्षा विभाग उन्हें गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए ट्रेनिंग देता रहा है। देशभर आए विभिन्न शिक्षक संगठनों का कहना था कि वर्ष 2011 से पहले भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की कोई अनिवार्य शर्त नहीं थी।
यदि होती तो वे उस समय अनिवार्य पात्रता परीक्षा का पास करते। अब अचानक 2025 में शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य का फैसला थोपा गया है। ऐसे में वे बच्चों को पढ़ाएं या फिर अपनी परीक्षा की तैयारी करें। उदाहरण के तौर मोहन लाल की आयु 53 साल है, अब उन्हें नौकरी बचाए रखने में परीक्षा देनी होगी। एक अनुमान के मुताबिक, टीईटी लागू होने से उत्तर प्रदेश में लगभग 1. 86 लाख और देश भर में लगभग 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। रैली में सांसद जगदम्बिका पाल ने भी संबोधित करते हुए कहा, वे शिक्षकों के साथ हैं। इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात करके उन्हें शिक्षकों की दिक्कतों के बारे में बताया जाएगा। विरोध धरना प्रदर्शन में ध्रुव कमार त्रिपाठी एमएलसी, सुरेश कुमार त्रिपाठी पूर्व एमएलसी, राम मूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी समेत अन्य मौजूद रहे।