

नयी दिल्ली-मणिपुर : उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2009 में मणिपुर के उखरुल जिले में तीन सरकारी अधिकारियों के अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नगा उग्रवादी होपेसन निंगशेन को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने सोमवार को उसकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट शर्त लगाई कि निंगशेन अपील के लंबित रहने तक दिल्ली की सीमाओं के भीतर ही रहेगा और अदालत की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर नहीं जाएगा।
17 साल से अधिक समय से जेल में बंद है निंगशेन
सुप्रीम कोर्ट ने सजा निलंबित करने का आधार निंगशेन का लंबे समय से जेल में रहना बताया। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता 17 साल से अधिक समय से जेल में बंद है और उसकी मुख्य अपील अभी लंबित है। ऐसे में उसने केवल सजा के निलंबन के आधार पर राहत की मांग की थी। अदालत ने इसी आधार पर सजा को निलंबित करने का आदेश दिया, लेकिन उसकी आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगाई। निंगशेन को दिल्ली की सीमा में रहने और अपील का अंतिम फैसला आने तक दिल्ली से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया गया है। मणिपुर सरकार की ओर से पेश वकील ने सजा निलंबित करने की याचिका का विरोध किया था। यह मामला फरवरी 2009 में मणिपुर के उखरुल जिले में हुए अपहरण और हत्या से जुड़ा है। निंगशेन को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-इसाक मुइवा (एनएससीएन-आईएम) से जुड़ा बताया गया था। वह संगठन में स्वयंभू ‘‘लेफ्टिनेंट’’ के रूप में काम करता था। मामले के अनुसार, 13 फरवरी 2009 को निंगशेन और एनएससीएन-आईएम के अन्य उग्रवादियों ने उखरुल जिले के कसोम खुल्लेन में तैनात एसडीओ-सह-बीडीओ डॉ. थिंगनम किशन सिंह तथा उनके पांच निजी स्टाफ सदस्यों का अपहरण कर लिया था। अगले दिन अपहृत लोगों में से तीन को छोड़ दिया गया। ये तीनों नगा समुदाय से थे। वहीं डॉ. किशन सिंह, वाई. टोकन सिंह और ए. राजेन शर्मा की हत्या कर दी गई।
नदी के किनारे मिले थे शव
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मुताबिक, हत्या के बाद तीनों अधिकारियों के शव मणिपुर में सेनापति के पास तपाओ कुकी नदी के किनारे से बरामद किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि निंगशेन ने एनएससीएन-आईएम के अन्य उग्रवादियों के साथ मिलकर अपहरण और हत्याओं की साजिश रची थी। उसे मृत अधिकारियों का सामान लूटने का भी दोषी पाया गया था। निचली अदालत ने 2014 में होपेसन निंगशेन को तीन सरकारी अधिकारियों के अपहरण और हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने उसे लूट के मामले में भी दोषी पाया और 35,000 रुपये का जुर्माना लगाया। निंगशेन ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 नवंबर 2019 को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जहां उसकी अपील अभी लंबित है।
मणिपुर से दिल्ली स्थानांतरित हुआ था मुकदमा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुकदमे को मणिपुर से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मई 2010 में मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित की गई। सीबीआई को आशंका थी कि यदि निंगशेन को मणिपुर की अदालत में पेश किया गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है और इससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी वजह से मामले की सुनवाई दिल्ली में कराने का निर्णय लिया गया। तीन सरकारी अधिकारियों की हत्या के बाद मणिपुर में मेइती और नगा समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया था। घटना के विरोध में राज्य के विभिन्न हिस्सों में कई बंद आयोजित किए गए। मामले की संवेदनशीलता और संभावित जातीय तनाव को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जांच के दौरान सीबीआई ने 29 मई 2009 को होपेसन निंगशेन को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसके खिलाफ अपहरण, हत्या, आपराधिक साजिश और लूट सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा चला।
अब अपील के अंतिम फैसले का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद निंगशेन की उम्रकैद की सजा फिलहाल निलंबित रहेगी। हालांकि, इससे उसके दोषसिद्धि के खिलाफ लंबित अपील का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अदालत ने उसकी रिहाई को दिल्ली तक सीमित रखने की शर्त के साथ मंजूरी दी है। अब मामले में उसकी लंबित अपील पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार रहेगा।