CBSE पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा खोलने से 'सुप्रीम' इनकार

उच्चतम न्यायालय ने जतायी नाराजगी
CBSE पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा खोलने से 'सुप्रीम' इनकार
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कक्षा 12 के उन छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन का पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने से इनकार कर दिया, जिन्होंने ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन (OSM) व्यवस्था को लेकर शिकायतें की थीं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना के पीठ ने कहा कि पुनर्मूल्यांकन की सुविधा सभी छात्रों के लिए निर्धारित समय तक उपलब्ध थी। ऐसे में अब पोर्टल दोबारा खोलने से नए दावों की बाढ़ आ सकती है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत से पोर्टल को कम से कम एक सप्ताह के लिए फिर से खोलने का अनुरोध किया। उन्होंने दावा किया कि वेबसाइट में तकनीकी समस्या आने के कारण कई छात्र निर्धारित अवधि में ऑन-स्क्रीन सत्यापन के लिए आवेदन नहीं कर सके। हालांकि, अदालत ने इस मांग पर सहमति नहीं जताई।

दोबारा खोलना अनुचित होगा

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब किसी अवसर के लिए समयसीमा तय की गई हो और वह सभी के लिए उपलब्ध हो, तो बाद में उसे चुनिंदा लोगों के लिए दोबारा खोलने का निर्देश देना उचित नहीं होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति बस में समय पर नहीं चढ़ता तो बस छूट जाती है

1.68 लाख छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन का आवेदन भरा

वहीं, CBSE की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि निर्धारित अवधि के दौरान करीब 1.68 लाख छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन अथवा संबंधित प्रक्रिया के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया था। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही इसी तरह की एक याचिका खारिज कर चुका है।

मामला CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था से जुड़ा है। इस प्रणाली में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप में मूल्यांकनकर्ताओं के सामने प्रस्तुत किया जाता है। शिक्षक कागज पर उत्तर पुस्तिका जांचने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर उसकी स्कैन कॉपी देखकर अंक देते हैं।

OSM व्यवस्था के क्रियान्वयन में अनियमितताएं

याचिकाकर्ताओं ने OSM व्यवस्था के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पन्ने स्कैन नहीं हुए, कुछ स्कैन प्रतियां स्पष्ट नहीं थीं और कुछ उत्तरों या पूरे पन्नों का मूल्यांकन नहीं किया गया। इसी आधार पर उन्होंने पुनर्मूल्यांकन की सुविधा उपलब्ध कराने और प्रक्रिया की खामियों को दूर करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि फिलहाल पोर्टल दोबारा खोलने से इनकार कर दिया। मामले में याचिकाकर्ताओं की मुख्य चुनौती CBSE द्वारा कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लागू OSM व्यवस्था के तरीके से संबंधित है।

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