दुनिया भर के टीन एजर और युवाओं की खुशियां छीन रहा है सोशल मीडिया

फिनलैंड दुनिया का सबसे खुश और अफगानिस्तान सबसे दुखी देश – रिपोर्ट
दुनिया भर के टीन एजर और युवाओं की खुशियां छीन रहा है सोशल मीडिया
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सर्जना शर्मा

पश्चिम एशिया में 21 दिन से चल रहे भंयकर युद्ध के बीच आज संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व प्रसन्नता दिवस मना रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने इस अवसर पर पूरी दुनिया के देशों की एक हैप्पीनेस रिपोर्ट भी जारी की है जिसमें अफगानिस्तान दुनिया का सबसे दुखी देश और फिनलैंड सबसे खुश देश है। इस साल की रिपोर्ट में एक हैरान कर देने वाली बात सामने आयी है कि सोशल मीडिया के ज़रूरत से ज्यादा प्रयोग करने के कारण युवा विशेषकर टीन एजर खुश नहीं है उनकी शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत प्रभावित हो रही हैं। सवाल ये है कि इंसान को सच्ची खुशी कहां मिलती है अपार धन दौलत , भौतिक सुख सुविधाएं, आधुनिक तकनीक वाले गजट महंगे ब्रांड के कपडे . जूते चश्मे, देश विदेश की यात्राएं खुशी देता है क्या ? भारतीय नजरिए से देखा जाए तो धन दौलत भौतिक सुविधाएं सुख दे सकती हैं आनंद नहीं । आनंद वो है जो मन को उत्साह उमंग से भर दे कहा जाए तो सत चित्त आनंद। जब मन बिल्कुल शांत रहे रात को चैन की नींद आए वही सच्ची खुशी है सनातन धर्म के धर्म ग्रंथ कहते हैं जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति आसान है लेकिन इच्छाओं की पूर्ति कभी नहीं हो सकती और इच्छाओं और असलियत के बीच का गैप ही इंसान को खुशियों से दूर रखता है।

हमारे पड़ोसी देश भूटान ने तो जीडीपी के बजाए हैप्पीनेस इंडैक्स को ही प्राथमिकता दी 2010 में जब मैं महिला पत्रकारों के प्रतिनिधी मंडल के साथ भूटान यात्रा पर गयी थी तो भूटान नरेश से मुलाकात हुई। उस समय भी भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने पैसे के बजाए खुशी का महत्व हमें समझाय़ा था। भूटान नरेश ने बताया कि इंसान के मन की खुशी पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। और बाद में पता चला कि भूटान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हैप्पीनेस इंडेक्स का प्रस्ताव रखा 12 जुलाई 2012 को प्रस्ताव पारित किया गया 28 जून 2012 को 20 मार्च विश्व प्रसन्नता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। भाग दौड ,तनाव ,प्रतिस्पर्धा ज्यादा पैसा कमाने की चाह वैश्विक हालात सब इंसान के दिलो दिमाग पर असर डालते हैं। इन सबके बीच इंसान अपने मन के लिए छोटी छोटी खुशियां कैसे खोजे अपने घर परिवार आस पड़ोस के साथ कैसे खुश रहे यही प्रयास था संयुक्त राष्ट्र संघ का।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वार्षिक हैप्पीनेस रिपोर्ट – 2026 नॉर्डिक देश प्रसन्नता की सूची में विश्व के दस प्रसन्न देशों की सूची में शामिल हैं । ये देश हैं ,डेनमार्क, स्वीडन , आईलैंड और नार्वे । इस साल कोस्टा रिका की नयी एंट्री सूची में हुई है तीन साल पहले ये 23 वें नंबर पर था इस साल पांचवें नंबर पर है। फिनलैंड जो पहले नंबर पर आया है उसके राष्ट्रपति का दावा है कि सरकार की कल्याणकारी नीतियों के कारण लोगों का जीवन सुरक्षित और बेफ्रिक है। ---- समाप्त

आम तौर पर माना जाता है कि धन दौलत खुशियों का पैमाना है आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के अमीर देशों के लोग खुश नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, कनाडा , ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे संपन्न देशों में 25 साल से कम आयु के युवाओं का हैप्पीनेस इंडेक्स पिछले एक दशक में नीचे आया है। इसका मुख्य कारण सोशल मीडिया बताया गया है सबसे दूरी घर परिवार दोस्तों से दूरी घर परिवार से दूरी हर समय नेट पर सर्फिंग ने उनको सामाजिक रिश्तों से दूर कर दिया है। जब तक इंसान धर परिवार के साथ समय नहीं बिताएगा तब तक उसको असली खुशी नहीं मिल सकती। जो युवा सोशल मीडिया पर बहुत कम रहते हैं या बिल्कुल नहीं रहते उनका हैप्पीनेस इंडेक्स अच्छा है।

भारत में वैसे परिवार व्यवस्ता मजबूत है संयुक्त परिवार प्रथा कम होने के बाद भी परिवार सादी ब्याह तीज त्यौहार मिल तक मनाते हैं पूजा पाठ एक साथ करते हैं तीर्थ यात्राएं करते हैं। सोशल मीडिया का असर भारत में भी हो रहा है। संसद में अनेक सांसद 16 साल से कम उम्र के बच्चों को लिए सोशल मीडिया बैन किए जाने का प्रस्ताव संसद में रख चुके हैं। ये एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अब विश्व हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 के बाद तो ये और ज्यादा साबित हो गया है कि सोशल मीडिया समाज में दूरियां बना रहा है मानसिक शारीरिक भावनात्मक सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। अब इस दिशा में बड़ा कदम उठाना ज़रूरी है ताकि इंसानों की खुशियां और विशेष कर युवाओं की बनी रहें ।

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