सोशल मीडिया पर 'डिजिटल कर्फ्यू' : किशोरों की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन की नई पहल

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सोशल मीडिया पर 'डिजिटल कर्फ्यू'AI Generated Image
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डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा और सोशल मीडिया की लत एक वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है। इसी कड़ी में ब्रिटेन सरकार ने किशोरों के स्वास्थ्य और मानसिक विकास को सुरक्षित रखने के लिए एक सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। सरकार की नई सुरक्षा नीति का उद्देश्य युवाओं को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाना है।

आधी रात के बाद सोशल मीडिया पर 'डिफॉल्ट कर्फ्यू'

ब्रिटेन सरकार की आगामी योजना के अनुसार, 16 और 17 साल के युवाओं के लिए रात के समय सोशल मीडिया का उपयोग सीमित कर दिया जाएगा। नई गाइडलाइंस के तहत, आधी रात से सुबह 6 बजे के बीच सोशल मीडिया ऐप्स पर 'डिफॉल्ट कर्फ्यू' लागू होगा। इसका अर्थ यह है कि यदि किशोर अपनी फोन सेटिंग्स को मैन्युअल रूप से नहीं बदलते हैं, तो इन घंटों के दौरान वे ऐप्स का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

एडिक्टिव फीचर्स पर लगाम

सोशल मीडिया की लत का एक मुख्य कारण 'ऑटो-प्ले' फीचर है, जो बच्चों को अंतहीन वीडियो और पोस्ट स्क्रॉल करने के लिए प्रेरित करता है। सरकार ने इन नियमों के तहत ऐसे फीचर्स को भी नियंत्रित करने का फैसला किया है, ताकि बच्चों को रील्स और शॉर्ट्स के जाल से निकाला जा सके और उनकी डिजिटल लत को कम किया जा सके।

वैश्विक चिंता और भविष्य की रूपरेखा

दुनिया भर के अभिभावक और सरकारें इस बात से चिंतित हैं कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को किस कदर प्रभावित कर रहा है। ब्रिटेन सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाबंदियों से जुड़े नियमों का पहला मसौदा इस वर्ष के अंत तक संसद में पेश किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि ये नियम 2027 के वसंत तक पूरी तरह लागू कर दिए जाएंगे।

पाबंदियों की चुनौतियां और जमीनी हकीकत

सोशल मीडिया पर नियंत्रण पाने की राह आसान नहीं है। उदाहरण के तौर पर, ऑस्ट्रेलिया बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाला पहला देश बना था, लेकिन वहां भी यूजर की सही उम्र की पहचान करने की तकनीक विफल रही, जिससे प्रतिबंध का असर सीमित रहा। इसके अलावा, अमेरिका में भी गूगल और टिकटॉक जैसी दिग्गज कंपनियों को उन मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें उन पर नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

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