

दिल्ली : अर्धसैनिक बल में कार्यरत असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में इतिहास रचने जा रही हैं। इससे पहले कई बार महिला जवानों ने महिला टुकड़ियों का नेतृत्व किया है, लेकिन पहली बार किसी महिला अधिकारी को पूरी तरह 140 से अधिक जवान पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए कर्तव्य पथ पर देखा जाएगा। यह उपलब्धि भारतीय इतिहास में पहली बार दर्ज होने जा रही है। गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल के दौरान सिमरन की उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और आत्मविश्वास ने वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद ही यह निर्णय लिया गया कि इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए सिमरन को ही चुना जाएगा।
सिमरन का जन्म जम्मू के राजौरी जिले के छोटे से शहर नौशेरा में हुआ। उन्होंने जम्मू के गांधीनगर गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2025 में उन्होंने यूपीएससी द्वारा आयोजित असिस्टेंट कमांडेंट की परीक्षा उत्तीर्ण की और उसी वर्ष अप्रैल में देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में शामिल हुईं। प्रशिक्षण के दौरान सिमरन ने सीआरपीएफ अकादमी में सर्वश्रेष्ठ अधिकारी का पुरस्कार भी प्राप्त किया। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ में बस्तरिया बटालियन के साथ तैनात हैं, जहां उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें कई बार सराहना मिल चुकी है।
राजौरी जिले से सिमरन पहली महिला हैं, जिन्होंने असिस्टेंट कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंच बनाई है। आतंकवाद से प्रभावित जम्मू-कश्मीर के एक दूरदराज़ इलाके से निकलकर देश की सेवा कर रही यह युवा अधिकारी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं। भारतीय अर्धसैनिक बलों को भरोसा है कि सिमरन की यह उपलब्धि देशभर की युवतियों को आगे बढ़ने का हौसला देगी।