

सिलचर : सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के आगामी चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) में टिकट वितरण को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सिलचर के वार्ड नंबर 41 में पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नाराजगी जताई। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड 41 में वर्षों से सक्रिय स्थानीय दावेदारों की अनदेखी करते हुए पड़ोसी वार्ड नंबर 40 के एक व्यक्ति को पार्टी का टिकट दे दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने कहा कि वार्ड 41 से कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता लंबे समय से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं। उनका दावा है कि इन दावेदारों ने चुनावी गतिविधियों के अलावा आम लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को उठाते रहे हैं। इसके बावजूद टिकट देने में उनकी दावेदारी को महत्व नहीं दिया गया।
बाढ़ और कोरोना के दौरान लोगों की मदद का दावा
कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्थानीय दावेदार केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं हुए, बल्कि वर्षों से वार्ड के लोगों के बीच काम करते रहे हैं। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के साथ-साथ कोविड-19 महामारी के मुश्किल दौर में भी उन्होंने स्थानीय निवासियों की मदद की थी। नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि वार्ड के मतदाताओं के बीच स्थानीय दावेदारों की पहचान और उनकी सक्रियता को टिकट वितरण के दौरान प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बाहर से उम्मीदवार थोपे जाने से जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर स्पष्ट किया कि वे पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवार के समर्थन में काम नहीं करेंगे। उन्होंने वार्ड 41 से एक निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतारने की योजना की घोषणा की। कार्यकर्ताओं के इस रुख से आगामी नगर निगम चुनाव में BJP के लिए वार्ड 41 में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि पार्टी से जुड़े असंतुष्ट कार्यकर्ता वास्तव में निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारते हैं और उसके समर्थन में सक्रिय होते हैं, तो इससे BJP के आधिकारिक उम्मीदवार के सामने सीधी चुनौती पैदा हो सकती है।
स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा
वार्ड 41 में टिकट को लेकर सामने आया विवाद केवल पार्टी के अंदरूनी असंतोष तक सीमित नहीं है। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवार के क्षेत्र से सीधे जुड़े होने के सवाल को भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि नगर निगम चुनाव जैसे स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार का वार्ड के लोगों के साथ व्यक्तिगत संपर्क और क्षेत्र की समस्याओं की समझ बेहद महत्वपूर्ण होती है। उनका तर्क है कि स्थानीय स्तर पर वर्षों तक लोगों के साथ काम करने वाले व्यक्ति को क्षेत्र की समस्याओं और मतदाताओं की जरूरतों की बेहतर जानकारी होती है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को टिकट तय करते समय स्थानीय कार्यकर्ताओं की दावेदारी और जनता के साथ उनके जुड़ाव को ध्यान में रखना चाहिए था। इस विवाद के बीच वार्ड के कुछ स्थानीय मतदाताओं ने भी उम्मीदवार चयन को लेकर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि नगर निगम चुनाव में केवल पार्टी का चुनाव चिह्न या किसी राजनीतिक दल से उम्मीदवार का संबंध ही मतदान का आधार नहीं होगा। मतदाताओं के अनुसार, उम्मीदवार की स्थानीय पहचान, लोगों के साथ उसका संपर्क, वार्ड में उसकी उपलब्धता और क्षेत्र के लिए किए गए काम भी चुनावी फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे संकेत मिलता है कि वार्ड 41 में व्यक्तिगत छवि और स्थानीय पकड़ भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
BJP के लिए बढ़ सकती है चुनौती
सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे समय में वार्ड 41 में BJP कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ यदि असंतुष्ट कार्यकर्ता संगठित होकर निर्दलीय प्रत्याशी को मैदान में उतारते हैं, तो वोटों के बंटवारे की स्थिति बन सकती है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में BJP नेतृत्व इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या नाराज कार्यकर्ताओं को पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के समर्थन में वापस लाया जा सकेगा। फिलहाल, वार्ड 41 में टिकट को लेकर शुरू हुआ विवाद सिलचर नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच BJP के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय चुनौती बनकर उभरा है। चुनाव नजदीक आने के साथ यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या असंतुष्ट कार्यकर्ता वास्तव में निर्दलीय उम्मीदवार उतारते हैं, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।