

ढाका : कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बांग्लादेश ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के आधिकारिक आवास गणभवन को 'जुलाई जनविद्रोह स्मारक संग्रहालय' के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह संग्रहालय 2024 के सरकार विरोधी आंदोलन के दौरान हिंसा में मारे गए लोगों की स्मृति में स्थापित किया गया है। इसी आंदोलन के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को देश छोड़कर भारत जाना पड़ा था। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने गणभवन में संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस दौरान अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस भी मौजूद रहे। उद्घाटन के अवसर पर रहमान ने कहा कि फांसीवाद विरोधी आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं के दोषियों पर कानून की उचित प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी मुकदमा चलाया जाएगा। कानून का शासन सुनिश्चित करने के लिए हर अपराध पर न्याय जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जुलाई जनविद्रोह में मारे गए आंदोलनकारियों तथा 2009 से अवामी लीग शासन के दौरान मारे गए लोगों के नाम पर सरकारी संस्थानों का नाम रखा जाएगा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच हुए आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 1,400 तक लोगों की मौत हुई थी। यह आंदोलन सरकारी नौकरियों में विवादित आरक्षण (कोटा) प्रणाली के विरोध से शुरू हुआ था। शेख हसीना के 5 अगस्त 2024 को भारत आने के तीन दिन बाद मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार का पद संभाला था। सरकार, राजनीतिक दलों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने 5 अगस्त को 'जुलाई जनविद्रोह दिवस' के रूप में मनाया। इस अवसर पर उन छात्रों और अन्य लोगों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने शेख हसीना सरकार के कथित "कुशासन और निरंकुशता" के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया था।
इस बीच, शेख हसीना के नई दिल्ली से वर्चुअल सार्वजनिक संबोधन की संभावना को देखते हुए पूरे बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। सरकार ने पहले ही देशव्यापी सुरक्षा अलर्ट जारी किया था और पुलिस को विशेष सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। हालांकि बुधवार दोपहर तक किसी हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।