UGC समता विनिमय 2026 के खिलाफ अनेक संगठन व सियासी दल हुए लामबंद

27 जनवरी को यूजीसी मुख्यालय के बाहर और देशव्यापी प्रदर्शन
UGC समता विनिमय 2026 के खिलाफ अनेक संगठन व सियासी दल हुए लामबंद
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नई दिल्ली ( दिल्ली ब्यूरो ) ः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के समता विनियम 2026 पर छात्रों और शिक्षकों के बाद वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन, गुजरात बीजेवाईएम के पूर्व अध्यक्ष हार्दिक भावसर, क्षत्रीय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ राज शेखावत, शिवसेना राज्यसभा सांसद प्रियंका चर्तुवेदी एवं यूपी के विधान पार्षद देवेंद्र प्रताप सिंह भी विरोध में आ गए हैं।

आनंद रंगनाथन और हार्दिक भावसर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे अभिभावक के तौर पर दखल देने और इसमें संशोधन की मांग रखी है। स्वर्ण जातियों के प्रतिनिधियों ने 27 जनवरी को देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है। यूजीसी मुख्यालय के बाहर दिल्ली में ये संगठन बैठक करके आगे की रणनीति तय करेंगे। वहीं, देश भर में यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।

वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने अपने एक्स पर पीएम मोदी को टैग किया है। उन्होंने लिखा है समता विनियम अन्यायपूर्ण हैं और इसमें संशोधन आवश्यक है। इसमें, जातिगत भेदभाव पीड़ित की परिभाषा सामान्य वर्ग को शामिल नहीं किया गया है। समता समिति की संरचना में सामान्य वर्ग का उल्लेख नहीं है, झूठी शिकायतों को दंडित करने का कोई प्रावधान नहीं है। उधर, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह का मानना है कि यह फैसला सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न कर देगा और समाज में जाति संघर्ष बढ़ेगा। शिक्षण संस्थानों में गहरी खाई बनेगी और पढ़ाई का माहौल खत्म हो जाएगा। यूजीसी का काम, दलित व पिछड़े छात्रों का उत्पीड़न रोकना होना चाहिए न की सामान्य वर्ग के छात्रों को असुरक्षित करना।

प्रधानमंत्री के अपने गृह राज्य और उन्हीं की पार्टी के भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष हार्दिक भावसर ने उनको पत्र लिखा हैः आप बेहतर जानते हैं कि यूजीसी की कार्यशैली में कैसे सुधार करना है, लेकिन हमें अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित चाहिए। यूजीसी के समता विनियम 2026 में एक फीसदी भी फायदा नहीं है। क्योंकि, झूठी शिकायत करने वालों को सजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे नियमों में समता विनियम कहना विरोधाभास है। यह संतुलन नहीं, एक तरफा डर पैदा करने वाली व्यवस्था है। मोदी सरकार अब तक जन-भावनाओं को समझने और सुधार के लिए जानी जाती है। नौकरशाही के ऐसे फैसलों पर सख्त नियंत्रण जरूरी है, जो सरकार को बार-बार असहज स्थिति में डाले।

क्षत्रीय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत ने यूजीसी समता विनियम 2026 पर आपत्तियां उठाई हैं। उनका कहना है स्वर्ण छात्र जातिगत भेदभाव करें तो कठोर सजा मिलनी चाहिए। लेकिन रंजिश, दुर्भावना व झूठे आरोप में फंसाने पर शिकायतकर्ता को सजा का प्रावधान नहीं है। वहीं, ओबीसी छात्र यदि एससी-एसटी छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यहां ओबीसी को पीड़ित पक्ष बनाया है तो क्या सामान्य वर्ग के छात्रों को पहले से ही दोषी मान लिया गया है। इसलिए तत्काल प्रभाव से भारत के संविधान मे निहित समानता, न्याय व प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत यूजीसी समता विनियम 2026 की दोबारा समीक्षा की जाए और रोल बैक लिया जाए।

शिवसेना ( उद्धव ठाकरे ) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी भी खुल कर सामने आ गई हैं। उन्होंने कहा कैंपस में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव गलत है और पहले ही कई छात्र इसके दुष्परिणाम झेल चुके हैं। कानून लागू होने पर झूठे मामलों की स्थिति का क्या होगा। दोष का निर्धारण; भेदभाव को शब्द, कार्य या धारणा में से कैसे परिभाषित किया जाएगा। कानून लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट, सटीक, सभी के लिए समान होनी चाहिए। इसलिए कैंपस में नकारात्मक माहौल बनाने की बजाय, अधिसूचना वापस हो या उसमें संशोधन किया जाए।

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