

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम -- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने द्वीपों में कार्यरत शिक्षकों के सामने अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा की योग्यता प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों का मामला उठाया है। उन्होंने अंडमान और निकोबार प्रशासन से राज्य शिक्षा संस्थान के माध्यम से स्थानीय स्तर पर शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित किए जाने की संभावना की जांच करने का आग्रह किया है।
मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में सांसद ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर प्राथमिक विद्यालय शिक्षक और स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पदों पर कार्यरत ऐसे शिक्षकों, जिन्होंने अभी तक आवश्यक शिक्षक पात्रता परीक्षा की योग्यता प्राप्त नहीं की है, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर यह योग्यता हासिल करनी होगी। बताया गया है कि इसके लिए अगस्त 2028 तक की अवधि निर्धारित है। उन्होंने इस समय सीमा के भीतर शिक्षकों को नियमित और आसानी से उपलब्ध अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सांसद के साथ कार्यरत शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के दौरान यह बात उनके संज्ञान में लाई गई कि द्वीपों में शिक्षक मुख्य रूप से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा पर निर्भर हैं। चूंकि यह परीक्षा सीमित अंतराल पर आयोजित होती है और परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता भी सीमित रहती है, इसलिए द्वीपों के शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए पर्याप्त अवसर प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सांसद ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू नियमों और नियामक व्यवस्था के तहत जहां अनुमति है, वहां अधिकृत या मान्यता प्राप्त परीक्षा संस्थाओं के माध्यम से शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कराने की व्यवस्था की गई है। ऐसी व्यवस्थाओं से शिक्षकों को अतिरिक्त अवसर मिलते हैं और उन्हें एकमात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
सांसद ने यह भी बताया कि प्रशासन के पास राज्य शिक्षा संस्थान के रूप में पहले से ही एक स्थापित शैक्षणिक संस्था मौजूद है। उन्होंने आग्रह किया कि द्वीपों के पात्र कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की दृष्टि से राज्य शिक्षा संस्थान की उपयुक्तता की जांच की जाए।
यदि यह व्यवस्था नियमों के अनुरूप अनुमत और व्यावहारिक पाई जाती है, तो राज्य शिक्षा संस्थान के माध्यम से स्थानीय स्तर पर शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने से शिक्षकों के लिए परीक्षा तक पहुंच आसान हो सकती है। विशेष रूप से दूरदराज और भौगोलिक रूप से अलग-अलग स्थित द्वीपों में तैनात शिक्षकों को इससे लाभ होगा। इसके साथ ही मुख्यभूमि के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा करने की आवश्यकता कम होगी और उनके कार्य तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों में होने वाला व्यवधान भी कम किया जा सकेगा।
सांसद ने मुख्य सचिव से इस प्रस्ताव की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और व्यावहारिक पाए जाने पर सक्षम वैधानिक तथा नियामक प्राधिकरणों से आवश्यक स्वीकृति और मान्यता प्राप्त करने के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया है, ताकि राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उपयुक्त अंतराल पर द्वीपों में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कराई जा सके।
सांसद ने इस मामले को भारत सरकार के शिक्षा मंत्री के समक्ष भी जानकारी और आवश्यक विचार के लिए भेजा है।