फसलें बचाने के लिए कर्नाटक से कृष्णा नदी का पानी छोड़ने का आग्रह

तेलंगाना के मंत्री और कांग्रेस विधायकों ने डीके शिवकुमार से की मुलाकात
कृष्णा नदी पर बना बांध
कृष्णा नदी पर बना बांध
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एक महीने तक 5,000 क्यूसेक पानी मांगा

हैदराबाद : तेलंगाना में कृष्णा नदी पर निर्भर सिंचाई परियोजनाओं के तहत आने वाले इलाकों में फसलों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने कर्नाटक से पानी छोड़ने का अनुरोध किया है।

तेलंगाना के पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव के नेतृत्व में सत्तारूढ़ कांग्रेस के कई विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार शाम बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के जलाशयों से कृष्णा नदी में एक महीने तक 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आग्रह किया।

तेलंगाना सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को बताया कि राज्य में कृष्णा नदी और उससे जुड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर निर्भर किसानों के सामने इस समय पानी की गंभीर जरूरत पैदा हो गई है। खास तौर पर जुराला, नेट्टमपाडु, भीमा और कोइलासगर परियोजनाओं के तहत आने वाले कृषि क्षेत्रों में खड़ी फसलें ऐसे चरण में हैं, जहां पर्याप्त सिंचाई नहीं मिलने पर उत्पादन प्रभावित होने और फसलें सूखने का खतरा है।

5.5 लाख एकड़ फसल को पानी की जरूरत

तेलंगाना के प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक सरकार के सामने सबसे बड़ा तर्क कृषि क्षेत्र का दिया। उसके मुताबिक, जुराला, नेट्टमपाडु, भीमा और कोइलासगर परियोजनाओं के अंतर्गत करीब 5.5 लाख एकड़ भूमि पर फसलें खड़ी हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन परियोजनाओं से जुड़े किसान फिलहाल फसल के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए कृष्णा नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित कर्नाटक के जलाशयों से सीमित अवधि के लिए पानी छोड़ा जाना जरूरी है।

एक महीने तक 5,000 क्यूसेक पानी की मांग

तेलंगाना सरकार ने कर्नाटक से एक महीने तक प्रतिदिन 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया है। क्यूसेक पानी के बहाव की दर मापने की इकाई है। एक क्यूसेक का अर्थ एक घन फुट प्रति सेकंड पानी के प्रवाह से है।

तेलंगाना के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री शिवकुमार के सामने यह मांग रखते हुए कहा कि पानी मिलने से कृष्णा बेसिन में तेलंगाना की उन सिंचाई परियोजनाओं को राहत मिल सकेगी, जिन पर बड़ी संख्या में किसान निर्भर हैं।

डीके शिवकुमार की सकारात्मक प्रतिक्रिया

तेलंगाना सरकार के बयान के अनुसार, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कर्नाटक सरकार पानी छोड़ने की अंतिम मात्रा, तारीख और वास्तविक प्रवाह व्यवस्था के संबंध में क्या निर्णय लेगी।

इसलिए फिलहाल इसे तेलंगाना की ओर से किए गए अनुरोध और कर्नाटक के मुख्यमंत्री की सकारात्मक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। पानी वास्तव में कब और कितनी मात्रा में छोड़ा जाएगा, इसका औपचारिक निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

जुराला क्षेत्र के किसानों का आंदोलन

तेलंगाना सरकार का यह अनुरोध ऐसे समय आया है जब कर्नाटक सीमा से लगे जोगुलाम्बा गद्वाल जिले में किसान पानी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले के जुराला परियोजना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में किसान खड़ी फसलों को बचाने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

किसानों की चिंता यह है कि फसलें इस समय सिंचाई के लिए पानी की मांग कर रही हैं और यदि समय पर पानी नहीं मिला तो पहले की गई बुवाई और कृषि पर किया गया खर्च प्रभावित हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने कर्नाटक के समक्ष हस्तक्षेप की मांग रखी है।

जुराला परियोजना पर विशेष दबाव

जुराला परियोजना कृष्णा नदी से जुड़ी तेलंगाना की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल है। कर्नाटक से आने वाला पानी तेलंगाना में प्रवेश करने के बाद कृष्णा नदी की जल उपलब्धता और उससे जुड़ी सिंचाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। जुराला क्षेत्र में पानी की उपलब्धता का असर केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ जुड़े नहर तंत्र और अन्य सिंचाई योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में नदी के प्रवाह में कमी होने पर किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

नेट्टमपाडु और भीमा परियोजनाओं पर भी असर

तेलंगाना प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के सामने केवल जुराला क्षेत्र की समस्या नहीं रखी, बल्कि नेट्टमपाडु और भीमा सिंचाई परियोजनाओं के तहत आने वाले कृषि क्षेत्रों का भी मुद्दा उठाया।

इन परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए कृष्णा नदी के पानी पर निर्भर हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इन क्षेत्रों में फसलें महत्वपूर्ण अवस्था में हैं और पानी की कमी का सीधा असर पैदावार पर पड़ सकता है।

कोइलासगर परियोजना भी मांग के दायरे में

प्रतिनिधिमंडल ने कोइलासगर परियोजना के अंतर्गत आने वाले कृषि क्षेत्रों के लिए भी पानी की आवश्यकता बताई। तेलंगाना सरकार का कहना है कि चारों परियोजनाओं को मिलाकर लगभग 5.5 लाख एकड़ क्षेत्र में खेती की जा रही है। इसलिए सरकार का जोर केवल तत्काल पेयजल या सीमित सिंचाई जरूरत पर नहीं, बल्कि मौजूदा फसल चक्र को बचाने पर है।

कर्नाटक-तेलंगाना के बीच कृष्णा जल बंटवारा अहम मुद्दा

कृष्णा नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तेलंगाना के बीच पानी की उपलब्धता और उपयोग का मुद्दा व्यापक अंतरराज्यीय संदर्भ रखता है। दोनों राज्यों की कृषि और विभिन्न सिंचाई परियोजनाएं कृष्णा नदी प्रणाली पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी एक राज्य से दूसरे राज्य के लिए पानी छोड़ने का मामला केवल स्थानीय प्रशासनिक निर्णय नहीं रहता, बल्कि नदी के प्रवाह, जलाशयों में उपलब्ध पानी और संबंधित राज्यों की अपनी सिंचाई जरूरतों से भी जुड़ा होता है।

मौजूदा मामले में तेलंगाना का तर्क किसानों की तत्काल जरूरत पर केंद्रित है। दूसरी ओर, कर्नाटक के जलाशयों से पानी छोड़ने का निर्णय वहां की उपलब्ध जल मात्रा और कर्नाटक की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना होगा।

किसानों की नजर अब कर्नाटक के फैसले पर

तेलंगाना में जुराला और उससे जुड़े इलाकों के किसान अब कर्नाटक की ओर से होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने एक महीने के लिए 5,000 क्यूसेक पानी की मांग रखी है। यदि यह पानी छोड़ा जाता है तो तेलंगाना के कृष्णा बेसिन में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी में राहत मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि कर्नाटक सरकार कितनी मात्रा में पानी छोड़ती है, पानी कब छोड़ा जाता है और उसका कितना हिस्सा तेलंगाना की संबंधित परियोजनाओं तक पहुंचता है।

फसल के महत्वपूर्ण चरण में पानी की कमी बनी चुनौती

तेलंगाना सरकार के अनुसार, मौजूदा समय में खड़ी फसलों को बचाने के लिए सिंचाई का पानी बेहद जरूरी है। किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फसल तैयार होने से पहले सिंचाई में रुकावट होने पर अब तक किए गए बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च पर असर पड़ सकता है।

इसी कारण राज्य सरकार ने किसानों की मांग को लेकर कर्नाटक सरकार के सामने तत्काल पानी छोड़ने का मुद्दा उठाया है।

सरकार और किसानों के लिए अगला कदम अहम

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कर्नाटक सरकार तेलंगाना के अनुरोध पर कितना पानी छोड़ती है और इसके लिए क्या समयसीमा तय करती है। तेलंगाना की ओर से 5,000 क्यूसेक पानी एक महीने तक छोड़ने का अनुरोध किया गया है, जबकि कर्नाटक की ओर से फिलहाल केवल सकारात्मक प्रतिक्रिया की बात आधिकारिक बयान में कही गई है।

ऐसे में किसानों को वास्तविक राहत पानी के प्रवाह के शुरू होने और संबंधित सिंचाई परियोजनाओं तक उसके पहुंचने के बाद ही मिलेगी। फिलहाल जोगुलाम्बा गद्वाल और कृष्णा बेसिन के किसानों की निगाहें कर्नाटक के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

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