अंडमान को सामरिक और आर्थिक शक्ति केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : उप राज्यपाल

अंडमान को सामरिक और आर्थिक शक्ति केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : उप राज्यपाल
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान आइडिया समिट शिखर सम्मेलन 20 जून को शाम होटल लेमन ट्री में जित किया गया । अंडमान आइडिया समिट को संबोधित करते हुए, अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह के उप राज्यपाल एवं द्वीप विकास एजेंसी के उपाध्यक्ष, एडमिरल डी.के. जोशी, (अ.प्रा.) ने कहा कि ये द्वीप भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का लगभग एक तिहाई और देश की तटरेखा का एक चैथाई हिस्सा हैं, जो इन्हें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान बनाते हैं। उन्होंने मलाका जलडमरूमध्य के महत्व पर प्रकाश डाला, जो विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग एक लाख जहाज़ गुजरते हैं और प्रमुख हिंद-प्रशांत समुद्री यातायात को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि केवल भौगोलिक लाभ से ही रणनीतिक शक्ति नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए बुनियादी ढांचे, आर्थिक गतिविधियों और विकास का भी समर्थन आवश्यक है। विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए, उप राज्यपाल ने कहा कि दशकों तक सीमित बुनियादी ढांचे के विकास के बाद, कई महत्वपूर्ण सुधारात्मक उपाय किए गए हैं। विशेष रूप से 2017 में द्वीप विकास एजेंसी की स्थापना के बाद से इस दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। अंडमान ट्रंक रोड के विकास के साथ सड़क संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हम्फ्री स्ट्रेट पर बने आज़ाद हिंद फौज सेतु के पूरा होने और मिडिल स्ट्रेट पुल के निर्माणाधीन कार्य से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। डिजिटल कनेक्टिविटी को एक प्रमुख प्राथमिकता बताते हुए, उप राज्यपाल ने उल्लेख किया कि ऑप्टिकल फाइबर केबल परियोजना ने द्वीपों में संचार अवसंरचना को बदल दिया है। चेन्नई को श्री विजय पुरम और अन्य द्वीपों से जोड़ने वाली सबमरीन केबल परियोजना ने बैंडविड्थ क्षमता को लगभग 3.2 जीबीपीएस से बढ़ाकर 200 जीबीपीएस कर दिया है। उप राज्यपाल ने विमानन अवसंरचना के विकास को उन्नति का एक प्रमुख चालक बताया। श्री विजय पुरम स्थित नए वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन 2023 में हुआ था, जिससे हवाई संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय उड़ान संचालन को बहाल करने और अधिक सीधी उड़ानें शुरू करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि श्री विजय पुरम में एक नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की योजना बनाई जा रही है, जिसके लिए स्थल का चयन पूरा हो चुका है, भूमि की पहचान कर ली गई है और सर्वेक्षण भी किए जा चुके हैं।

प्रस्तावित हवाई अड्डे को पीपीपी मॉडल के माध्यम से उन्नत सुविधाओं और दोहरे उपयोग की क्षमता के साथ विकसित करने की योजना है। ग्रेट निकोबार में एक अन्य ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की परियोजना भी प्रगति पर है, साथ ही आईएनएस बाज़ और आईएनएस कोहासा में रनवे विस्तार परियोजनाएं भी चल रही हैं। इन विकास कार्यों से द्वीप श्रृंखला के साथ चार पूर्ण लंबाई के दिन-रात चलने वाले रनवे उपलब्ध होंगे, जिससे नागरिक और रणनीतिक दोनों क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। बंदरगाहों और जहाज़रानी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उप राज्यपाल ने कहा कि समुद्री क्षेत्र द्वीपों की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक होगा। ग्रेट निकोबार के गलाथिया बे में स्थित अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार बनने की उम्मीद है, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण कंटेनर हैंडलिंग बंदरगाहों में से एक के रूप में उभरने की क्षमता है।

अन्य समुद्री पहलों में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के सहयोग से जहाज़ मरम्मत इकोसिस्टम का विकास, पोर्ट मीडोज को जहाज़-से-जहाज़ ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करना और अटलांटा बे में गहरे पानी के बंदरगाह के अवसरों की खोज करना शामिल है। उप राज्यपाल ने कहा कि 7वीं आईडीए बैठक ने पिछली आईडीए बैठकों के निर्णयों को दोहराते हुए 2029 तक द्वीपों के 100 प्रतिशत डी-डीजलीकरण का निर्देश दिया। सौर ऊर्जा विस्तार, एलएनजी-आधारित बिजली उत्पादन और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की संभावित तैनाती की योजना भी बनाई जा रही है।

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