हिमाचल में बारिश जारी, तीन जिलों में रेड अलर्ट
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हिमाचल में बारिश जारी, तीन जिलों में रेड अलर्ट

कई स्थानों पर भूस्खलन
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शिमला : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में रविवार को कुछ स्थानों पर अत्यधिक बारिश की चेतावनी के मद्देनजर जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। सुक्खू ने कहा, ‘हम तैयार हैं।’

हिमाचल प्रदेश आपातकालीन अभियान केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, अब तक लगभग 566 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा है कि वास्तविक नुकसान करीब 700 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है क्योंकि आंकड़े अभी एकत्र किए जा रहे हैं। स्थानीय मौसम केंद्र ने रविवार को कांगड़ा, सिरमौर और मंडी जिलों में अत्यधिक बारिश के पूर्वानुमान के चलते रेड अलर्ट जारी किया है। जनजातीय जिलों किन्नौर और लाहौल एवं स्पीति को छोड़कर सात अन्य जिलों में भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मंडी जिले में पधर क्षेत्र के शिलभडानी गांव में स्वाड नाला में बादल फटने की घटना के बाद संपर्क मार्गों और छोटे पुलों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। हालांकि, अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। राज्य में 20 जून को मानसून के आगमन के बाद से अब तक 74 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 47 मौत बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी वर्षा जनित घटनाओं में हुई हैं। अब तक 115 लोग घायल हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में शनिवार शाम से बारिश जारी है। नागरोटा सूरियां में 102.4 मिमी, ऊना में 67.2 मिमी, गुलर में 62.4 मिमी, धर्मशाला में 61.1 मिमी और मंडी में 21.2 मिमी वर्षा दर्ज की गयी। मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान मध्यम से उच्च स्तर की बाढ़ आने की चेतावनी दी है। साथ ही, भूस्खलन, जलभराव, नाजुक संरचनाओं, फसलों और आवश्यक सेवाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गयी है। लोगों को जल स्रोतों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गयी है। इस बीच, मंडी जिले में लापता 31 लोगों की तलाश जारी है। मंगलवार को बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की 10 घटनाओं में यहां सबसे अधिक तबाही हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 14 शव बरामद किए जा चुके हैं और तलाश अभियान में खोजी कुत्तों व आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। एसईओसी के अनुसार, राज्य में 258 ट्रांसफॉर्मर और 278 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।


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