नेपाल में चार ग्लेशियर झीलों को खाली करने की तैयारी

पूरी परियोजना को छह साल तक लग सकते हैं
Preparations underway to drain four glacial lakes in Nepal
इलाके से सटा झील
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काठमांडू : नेपाल इस वित्त वर्ष में हिमालय की ऊंचाई पर स्थित चार ग्लेशियर झीलों का जलस्तर कम करने की योजना शुरू करेगा। इसका उद्देश्य झीलों के प्राकृतिक बांध टूटने और निचले इलाकों में अचानक बाढ़ के खतरे को कम करना है। यह कदम अगस्त में ग्लेशियर टूटने से आई आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत के बाद उठाया जा रहा है। सरकारी जल एवं संसाधन अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ सुभाष तुलाधर ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य झीलों के प्राकृतिक बांध टूटने की आशंका कम करना और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा घटाना है। इसके तहत नहरों के माध्यम से पानी को नियंत्रित तरीके से आसपास की नदियों में छोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, थुलागी, लोअर बरुण, लुमडिंग त्सो और होंगु-2 झीलों के लिए विस्तृत अध्ययन और डिजाइन का काम जुलाई 2027 तक चलने वाले वित्त वर्ष में शुरू होगा। ये झीलें 4,050 से 5,483 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं और 2020 की संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) तथा आईसीआईएमओडी की रिपोर्ट में नेपाल की सबसे संभावित खतरनाक ग्लेशियर झीलों में शामिल की गई थीं। करीब पांच करोड़ डॉलर की इस परियोजना को ग्रीन क्लाइमेट फंड, यूएनडीपी और नेपाल सरकार से वित्त पोषण मिलेगा। केंद्र के कार्यकारी निदेशक संजीव बराल ने बताया कि पूरी परियोजना को छह साल तक लग सकते हैं। इसमें सेंसर लगाने, बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली विकसित करने तथा निचले इलाकों में समुदायों को आपदा के लिए तैयार करने के उपाय शामिल होंगे।

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