परमाणु वैज्ञानिकों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों हेतु अंडमान में स्थलों का निरीक्षण किया

बड़े परियोजनाओं की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की तैयारी
समाचार 1 के लिए फोटो कैप्शन: अंडमान में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के संभावित स्थलों का निरीक्षण करने पहुंची परमाणु वैज्ञानिकों की टीम उपराज्यपाल से मुलाकात करते हुए।
समाचार 1 के लिए फोटो कैप्शन: अंडमान में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के संभावित स्थलों का निरीक्षण करने पहुंची परमाणु वैज्ञानिकों की टीम उपराज्यपाल से मुलाकात करते हुए।
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सन्मार्ग संवाददाता 

श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर स्थापित करने की सिफारिश के बाद, बड़े परियोजनाओं के कारण भविष्य में तेजी से बढ़ने वाली बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की एक टीम ने द्वीपों का दौरा शुरू किया है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की टीम 4 से 8 सितंबर 2026 तक अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में रहेगी और तीनों जिलों में प्रस्तावित छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के लिए उपयुक्त स्थलों का निरीक्षण करेगी। इन प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट, गहरे पानी के बहुउद्देशीय बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों सहित अन्य मेगा परियोजनाओं से संबंधित तेजी से बढ़ने वाली बिजली की जरूरतों को पूरा करना है।

द्वीपों के दौरे के दौरान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की टीम ने 4 सितंबर को लोक निवास में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के माननीय उपराज्यपाल एवं आइलैंड्स डेवलपमेंट एजेंसी के उपाध्यक्ष एडमिरल डी. के. जोशी, (सेवानिवृत्त) से मुलाकात की।

इस अवसर पर टीम ने प्रस्तावित योजना के संभावित स्थल और उससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण विशेषताओं के संबंध में प्रस्तुति भी दी। बैठक के दौरान प्रस्तावित छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की स्थापना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई तथा द्वीपों में इसके लिए उपयुक्त स्थानों के निरीक्षण और संभावित विकल्पों पर जानकारी साझा की गई।

इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा था कि प्रशासन के प्रस्तावों के परिणामस्वरूप फ्लोटिंग छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर की स्थापना की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया था कि इस संबंध में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र , न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और विद्युत मंत्रालय के विशेषज्ञों के इस महीने द्वीपों में पहुंचने के बाद अध्ययन किया जाएगा।

प्रस्तावित छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों को द्वीपों की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट, गहरे पानी के बहुउद्देशीय बंदरगाह और अन्य बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे स्थल निरीक्षण को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम माना जा रहा है।

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