

नई दिल्ली: पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पाकिस्तान के बारे की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए शनिवार को दावा किया कि ये बयान क्षेत्र में ‘अस्थिरता को बढ़ावा देने’ के भारत के ‘चिंताजनक रिकॉर्ड’ से ध्यान हटाने के लिए की गई थीं। जयशंकर ने शुक्रवार को कहा था कि “बुरे पड़ोसियों” के मामले में भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और यदि कोई पड़ोसी देश भारत में आतंकवाद फैलाना जारी रखता है तो वह नयी दिल्ली से पानी साझा करने की मांग नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया था।
अंद्राबी ने आरोप लगाया - भारत तनाव बढ़ा रहा है
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया के सवालों के जवाब में जारी बयान में कहा, “पाकिस्तान भारत के विदेश मंत्री द्वारा किए गए गैर-जिम्मेदाराना दावों को पूरी तरह से खारिज करता है।” अंद्राबी ने आरोप लगाया कि भारत एक बार फिर “क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने वाले पड़ोसी” के रूप में अपने “चिंताजनक रिकॉर्ड” से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।
सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता
उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) सद्भावना के साथ संपन्न एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, और इसका कोई भी एकतरफा उल्लंघन क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करेगा। अंद्राबी ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान संधि के तहत अपने वैध अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने स्थगित किया था सिंधु जल संधि
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक उपाय लागू किये थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को ‘‘स्थगित’’ करना भी शामिल था। विश्व बैंक की मध्यस्थता से गठित आईडब्ल्यूटी 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है।
अंद्राबी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ‘‘कश्मीरी लोगों को उनके स्वयं निर्णय करने के अधिकार को साकार करने के लिए उनके न्यायसंगत संघर्ष में पूर्ण राजनीतिक, नैतिक और राजनयिक समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।’’