ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी ताकत की परीक्षा, डीआरडीओ की तकनीक ने बढ़ाई भारत की सैन्य तैयारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियाँ अब सिर्फ़ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं
ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी ताकत की परीक्षा, डीआरडीओ की तकनीक ने बढ़ाई भारत की सैन्य तैयारी
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अंजली भाटिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियाँ अब सिर्फ़ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युद्धक्षेत्र में देश की ऑपरेशनल तैयारी को मज़बूती दे रही हैं। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सोच बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। रक्षा मंत्री डीआरडीओ के उन वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मियों को संबोधित कर रहे थे, जिन्हें 77वें गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल किया गया, जिससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की नीति को बल मिला है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का दौर तकनीक आधारित युद्ध का है, जहां तेज़ फैसले और तेज़ तैनाती निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने वैज्ञानिकों से नवाचार के साथ सोचने और जोखिम लेने से न डरने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो तकनीक आज नई है, वह कुछ वर्षों में अप्रासंगिक हो सकती है, इसलिए अब “योग्यतम की उत्तरजीविता” से आगे बढ़कर “सबसे तेज़ की उत्तरजीविता” के सिद्धांत पर काम करना होगा। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ को सलाह दी कि वह उन क्षेत्रों से आगे बढ़े, जहां निजी क्षेत्र पहले ही सक्षम हो चुका है। उन्होंने संगठन के भीतर एक ऐसे विशेष प्रकोष्ठ के गठन का सुझाव दिया, जो कठिन और जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करे। उन्होंने कहा कि भले ही सफलता की संभावना कम हो, लेकिन अगर कामयाबी मिलती है तो वह ऐतिहासिक होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुसंधान से लेकर तैनाती तक की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना बेहद ज़रूरी है। सेना में समय पर तकनीक की एंट्री को डीआरडीओ की कार्यकुशलता का सबसे बड़ा पैमाना बताया। इसके लिए उन्होंने उद्योगों को शुरुआती चरण से ही डिज़ाइन और विकास प्रक्रिया में शामिल करने की जरूरत पर ज़ोर दिया।

रक्षा निर्यात पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 में जहां रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 24,000 करोड़ रुपये हो चुका है। सरकार ने 2029–30 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने डीआरडीओ से कहा कि ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और गोला-बारूद जैसे क्षेत्रों में निर्यात को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया जाए।

कार्यक्रम में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया और आकाश मिसाइल प्रणाली की सफलता पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि डीआरडीओ वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

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