केरल में निपाह का खतरा! संदिग्ध मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में

कोझिकोड में संदिग्ध निपाह केस के बाद राज्य सरकार हाई अलर्ट पर, प्रभावित इलाके में सख्त निगरानी और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज, मरीज के सैंपल पुणे की लैब भेजे गए
निपाह वायरस दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रामक रोगों में गिना जाता है। यह एक जूनोटिक वायरस है
केरलम में एक बार फिर निपाह वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है
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केरलम में एक बार फिर निपाह वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। कोझिकोड जिले में 43 वर्षीय एक व्यक्ति की प्रारंभिक जांच में निपाह वायरस संक्रमण के संकेत मिलने के बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित संक्रमण को देखते हुए प्रभावित क्षेत्र में निगरानी और बचाव उपाय तेज कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मरीज का उपचार सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। संक्रमण की अंतिम पुष्टि के लिए उसके नमूने पुणे स्थित National Institute of Virology भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक प्रशासन किसी भी जोखिम से बचने के लिए एहतियाती कदम उठा रहा है।

क्यों बढ़ जाती है निपाह को लेकर चिंता?

निपाह वायरस दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रामक रोगों में गिना जाता है। यह एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार फल खाने वाले चमगादड़ इसके प्रमुख प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं।

यदि चमगादड़ों द्वारा संक्रमित फल या खाद्य पदार्थ किसी व्यक्ति के संपर्क में आ जाएं, तो संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। कुछ मामलों में संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी वायरस फैलने की आशंका रहती है, जिससे इसके प्रकोप को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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क्या हैं निपाह वायरस के शुरुआती संकेत?

निपाह संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिसके कारण शुरुआती पहचान कठिन हो जाती है।

संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। संक्रमण गंभीर होने पर मरीज को दौरे पड़ सकते हैं और स्थिति मस्तिष्क संक्रमण तक पहुंच सकती है। कई मामलों में रोगी कोमा में भी जा सकता है।

मृत्यु दर भी है चिंता का कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस की मृत्यु दर कई अन्य वायरल संक्रमणों की तुलना में काफी अधिक होती है। विभिन्न प्रकोपों में इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक दर्ज की गई है।

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण की समय रहते पहचान और उचित चिकित्सा निगरानी से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है।

अभी तक नहीं है कोई विशेष इलाज

निपाह वायरस के लिए फिलहाल कोई विशेष एंटीवायरल दवा या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। उपचार मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों को नियंत्रित करने और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को सहयोग देने पर आधारित होता है।

दुनिया भर में इस वायरस के टीके और प्रभावी उपचार विकसित करने को लेकर शोध जारी है।

स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी निगरानी

संभावित मामले के सामने आने के बाद केरल स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क में आए लोगों की पहचान, निगरानी और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पतालों को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी तरह के असामान्य बुखार, सांस संबंधी परेशानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले में अंतिम पुष्टि पुणे की प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्ट पर निर्भर है। हालांकि प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने कोई जोखिम न लेते हुए पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।

क्या सावधानी बरतें?

निपाह वायरस के खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञ कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। इसके तहत खुले या गिरे हुए फलों का सेवन न करने, फलों को अच्छी तरह धोकर ही खाने, बीमार व्यक्ति के निकट संपर्क से बचने, हाथों की नियमित सफाई करने, बुखार या संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

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