

काठमांडू : नेपाल के दक्षिणी मधेश और पूर्वी कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए प्रशासन ने रविवार को विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए कर्फ्यू में ढील दे दी। हालांकि, संवेदनशील इलाकों में अभी भी निषेधाज्ञा लागू है और सुरक्षा बलों की तैनाती जारी है। नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत भारत से सटे कोशी प्रांत के सुनसरी जिले में हुई थी। 26 जुलाई को दो समुदाय अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे। इस दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया और बाद में आसपास के क्षेत्रों तक फैल गया। अधिकारियों के अनुसार, इस हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। सप्तरी जिले के सहायक मुख्य जिला अधिकारी नरेश कुमार यादव ने बताया कि सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए राजबिराज नगर पालिका सहित जिले के दो क्षेत्रों से कर्फ्यू पूरी तरह हटा लिया गया है। इन इलाकों में अब केवल निषेधाज्ञा लागू रहेगी। इसी तरह धनुषा जिले में शनिवार से कर्फ्यू समाप्त कर दिया गया है, जबकि कुछ संवेदनशील स्थानों पर निषेधाज्ञा लागू की गई है। परसा जिले में केवल रात के समय निषेधाज्ञा लागू रहेगी। सिराहा जिले में भी कुछ इलाकों से कर्फ्यू पूरी तरह हटा लिया गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसमें आंशिक ढील दी गई है। इस बीच, मधेश प्रांत के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक सद्भाव, एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शांति रैलियों का आयोजन किया गया। गृह मंत्री सुधन गुरूंग की पहल पर रविवार को धनुषा जिले के जनकपुरधाम में सरकार और एक धार्मिक संगठन के बीच 13 सूत्री समझौते के तहत सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने, एकता को मजबूत करने और प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन समाप्त करने पर सहमति बनी।