

काठमांडू : नेपाल ने कहा है कि वह स्वयं को एक भू-आवेष्ठित (लैंडलॉक्ड) देश से बदलकर भारत और चीन के बीच एक जीवंत और गतिशील सेतु के रूप में विकसित करना चाहता है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शुक्रवार को यह बात कही। विदेश मंत्री खनाल दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'बहुध्रुवीय विश्व में चीन और दक्षिण एशिया' का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत और चीन दोनों की निरंतर प्रगति और समृद्धि का स्वागत करता है तथा दोनों पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नेपाल की विदेश नीति संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक लाभ तथा एक-दूसरे के वैध हितों और चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता के सिद्धांतों पर आधारित है। यह सम्मेलन चीन के फुदान विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज और नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एंगेजमेंट द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। खनाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार भारत और चीन के साथ संतुलित विदेश नीति अपनाने के साथ-साथ आर्थिक कूटनीति, निवेश और संपर्क (कनेक्टिविटी) को प्राथमिकता दे रही है।