

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर–2026 की औपचारिक शुरुआत हुई। डीजीएनसीसी कैंप में आयोजित उद्घाटन समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य अनुशासित, जिम्मेदार और राष्ट्रभाव से जुड़े युवाओं के हाथों में आकार ले रहा है और इस दिशा में एनसीसी की भूमिका निर्णायक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 78 वर्षों की यात्रा में एनसीसी दुनिया का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन बन चुका है। यह संगठन युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और सेवा-भाव विकसित कर राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। उनके अनुसार, गणतंत्र दिवस शिविर भारत की युवा शक्ति पर भरोसे और एकजुट राष्ट्र के संकल्प का जीवंत उदाहरण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की राह कुशल और अनुशासित युवाओं से होकर गुजरती है। उन्होंने कहा कि एनसीसी का आदर्श वाक्य “एकता और अनुशासन” आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
उपराष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एनसीसी कैडेट्स की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि करीब 72 हजार कैडेट्स ने सिविल डिफेंस कार्यों में स्वेच्छा से भाग लिया, जिससे संकट के समय देश के साथ खड़े रहने की उनकी प्रतिबद्धता सामने आई।
गणतंत्र दिवस के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को साकार करता है। देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए कैडेट्स यहां साथ रहकर प्रशिक्षण लेते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। उन्होंने वायनाड बाढ़ समेत आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों में एनसीसी की सक्रिय भूमिका की सराहना की।
एनसीसी प्रशिक्षण के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने साइबर और ड्रोन प्रशिक्षण की शुरुआत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम युवाओं को भविष्य की तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया, प्रदर्शनी देखी और कैडेट्स से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया।