एआई की निगरानी में राष्ट्रीय राजमार्ग

केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से लैस सीसीटीवी कैमरे और सेंसर नेटवर्क तैनात कर रही है, जो ब्लैक स्पॉट बनने से पहले ही सड़क की खामियों की पहचान कर लेगा।
एआई की निगरानी में राष्ट्रीय राजमार्ग
Published on

अंजलि भाटिया

नई दिल्ली : अब सड़क हादसों के खतरे की आहट पहले ही पकड़ ली जाएगी। केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से लैस सीसीटीवी कैमरे और सेंसर नेटवर्क तैनात कर रही है, जो ब्लैक स्पॉट बनने से पहले ही सड़क की खामियों की पहचान कर लेगा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अब तक ब्लैक स्पॉट की पहचान हादसों के बाद मैन्युअल आंकड़ों के आधार पर होती थी। नई व्यवस्था में एआई एल्गोरिद्म सड़क के घुमाव, ढलान, रोशनी की स्थिति, साइनबोर्ड की उपलब्धता और ट्रैफिक पैटर्न का विश्लेषण कर संभावित जोखिम का संकेत देगा। यह सिस्टम केवल पुराने रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि लाइव विजुअल फीड से लगातार सीखते हुए अपनी सटीकता बढ़ाता रहेगा।

अधिकारियों ने बताया कि एआई आधारित रोडल ऑब्जर्वेशन सिस्टम (आईआरओएस) के तहत यह पूरी व्यवस्था तैयार की जा रही है। कैमरे सड़क और यातायात से जुड़ा डेटा इकट्ठा कर उसे कंट्रोल सेंटर तक भेजेंगे, जहां उसका विश्लेषण किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन होने पर तुरंत अलर्ट जारी होगा और संबंधित एजेंसियां आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगी। इस केंद्रीकृत मॉनिटरिंग से निगरानी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।

चलती बसें बनेंगी ‘मोबाइल सर्वे यूनिट’

सार्वजनिक परिवहन की बसों और सरकारी वाहनों में एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) कैमरे और सेंसर लगाए जा रहे हैं। शहर में चलते समय ये वाहन सड़क के हर मोड़, गड्ढे, अंधेरे हिस्से और क्षतिग्रस्त संकेतकों की डिजिटल मैपिंग करेंगे। यह डेटा संबंधित निर्माण एजेंसियों तक पहुंचेगा, जहां एआई रिपोर्ट के आधार पर इंजीनियर लक्षित सुधार करेंगे,जैसे डिवाइडर की ऊंचाई में बदलाव, लेन चौड़ीकरण या साइनबोर्ड की पुनर्स्थापना।

अधिकारियों का कहना है कि इससे पूरी सड़क को उखाड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केवल उसी हिस्से पर काम किया जाएगा जिसे एआई संभावित ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित करेगा। इससे समय और लागत—दोनों की बचत होगी और मरम्मत अधिक प्रभावी होगी।

‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित सहायता

दुर्घटना की स्थिति में एआई सेंसर और स्मार्ट कैमरे नजदीकी ट्रॉमा सेंटर और एम्बुलेंस को तुरंत अलर्ट भेजेंगे। लक्ष्य है ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार शुरू कर जान बचाने की संभावना को बढ़ाना। मंत्रालय के मुताबिक, एआई-आधारित आईआरएएसटीई तकनीक को नागपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।

स्मार्ट सिग्नल और कम प्रदूषण

डायनेमिक सिग्नलिंग प्रणाली के तहत एआई कैमरे ट्रैफिक घनत्व का आकलन कर सिग्नल का समय स्वतः तय करेंगे। इससे अनावश्यक प्रतीक्षा कम होगी, ईंधन की खपत घटेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। अधिकारियों का दावा है कि बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन से शहरी कार्बन उत्सर्जन में 10–15 प्रतिशत तक कमी संभव है, जबकि यातायात नियमों के उल्लंघन में 30–40 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। लगातार मिलने वाले डेटा और रियल-टाइम फीड के जरिए पूरे सड़क नेटवर्क पर सतत निगरानी रखी जाएगी।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in