

गुवाहाटी : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सोमवार को असम की नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना है। उपचुनाव की घोषणा के साथ ही नागांव में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रमुख दलों ने चुनावी तैयारियां बढ़ा दी हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद 16 सितंबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख होगी। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि उम्मीदवार 19 सितंबर तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद चुनाव प्रचार तेज होने की उम्मीद है। राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि भाजपा का तत्काल लक्ष्य उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना है, जहां पार्टी ने पहले बेहतर प्रदर्शन किया था। सरमा ने कहा कि नागांव लोकसभा क्षेत्र में करीब 3.5 लाख अल्पसंख्यक मतदाता हैं और लोकसभा क्षेत्र के आठ विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिति अलग-अलग रही है। उनके अनुसार, भाजपा ने पहले नागांव, जागीरोड, मोरीगांव और राहा विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवारों ने समागुरी, ढिंग, रूपहीहाट और लाहोरीघाट में जीत दर्ज की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा इन चार विधानसभा क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाए रखने के साथ-साथ बाकी चार क्षेत्रों में भी अपना वोट शेयर बढ़ाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य पहले जीते हुए क्षेत्रों में अपनी स्थिति को सुरक्षित करना और अन्य क्षेत्रों में संगठन तथा जनसमर्थन को मजबूत करना है।
‘नागांव भाजपा का पारंपरिक गढ़ नहीं’
हालांकि मुख्यमंत्री ने नागांव लोकसभा सीट को भाजपा का पारंपरिक गढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार पार्टी को करीब 2.5 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए वह अभी से जीत या हार की भविष्यवाणी नहीं करना चाहते। सरमा ने कहा कि नागांव पारंपरिक रूप से भाजपा की सीट नहीं रही है और पार्टी यहां पहले न तो विधानसभा चुनावों में और न ही लोकसभा चुनावों में इस तरह की स्थिति में रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछली दो हार का अर्थ यह नहीं है कि पार्टी तीसरी बार भी निश्चित रूप से हार जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रचार अभियान चलाया जाएगा और अंतिम फैसला जनता करेगी। उधर, असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि पार्टी ने पूरे लोकसभा क्षेत्र में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि उपचुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक हुई, जिसमें जमीनी स्तर पर पार्टी को और सक्रिय करने की योजना बनाई गई। सैकिया के अनुसार, भाजपा आठ विधानसभा क्षेत्रों, 25 मंडलों और 2,306 बूथों पर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। पार्टी का जोर बूथ स्तर पर संपर्क बढ़ाने और लोगों का समर्थन हासिल करने पर रहेगा।
देवाशीष शर्मा को लेकर भी चर्चा
उपचुनाव की तैयारियों के बीच नागांव के पूर्व जिला आयुक्त और जिला चुनाव अधिकारी देवाशीष शर्मा से जुड़ा विवाद भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। खबरों के अनुसार, शर्मा के भाजपा में शामिल होने की संभावना है और उपचुनाव में उनकी संभावित उम्मीदवारी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों और उनकी कथित राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने शर्मा के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज की है। ऐसे में उपचुनाव से पहले यह मामला भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
सांसद के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट
नागांव लोकसभा सीट तत्कालीन सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बोरदोलोई ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। अब उनके इस्तीफे के कारण खाली हुई सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। उपचुनाव की तारीख घोषित होने के साथ ही नागांव में चुनावी मुकाबले की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। भाजपा जहां बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और अपने पुराने प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में बढ़त कायम रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं विपक्षी दलों के लिए अपने प्रभाव वाले चार विधानसभा क्षेत्रों को बचाए रखना अहम चुनौती होगी। 6 अक्टूबर का मतदान और 9 अक्टूबर की मतगणना इस मुकाबले का परिणाम तय करेगी।