

यंगून: म्यांमार में पांच साल के बाद हो रहे पहले आम चुनाव के दूसरे चरण के लिए रविवार को मतदान आरंभ हुआ। इस चरण में सैन्य सरकार और सशस्त्र विद्रोहियों के बीच जारी गृह युद्ध से प्रभावित कुछ इलाकों में भी मतदान हो रहा है। देश के सैगाइंग, मैगवे, मंडाले, बागो, तनिनथारयी क्षेत्र और मोन, शैन, काचिन, कयाह व कायिन राज्यों में स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे मतदान शुरू हुआ। अधिकतर इलाकों में हालिया महीनों में झड़प हुई हैं।
सशस्त्र संघर्षों के कारण यह चुनाव तीन चरणों में कराया जा रहा है। पहला चरण 28 दिसंबर को देश की कुल 330 टाउनशिप में से 102 में हुआ था। इसके बाद रविवार को दूसरे चरण का मतदान जारी है। अंतिम चरण का मतदान 25 जनवरी को होना है। हालांकि लड़ाई जारी रहने के कारण 65 टाउनशिप इसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगी। म्यांमा में दो सदनों वाली राष्ट्रीय संसद है, जिसमें कुल 664 सीट हैं। बहुमत हासिल करने वाली पार्टी नया राष्ट्रपति चुन सकती है, जो फिर मंत्रिमंडल नियुक्त कर नयी सरकार बनाता है। संविधान के तहत दोनों सदन में 25 प्रतिशत सीट सेना के लिए आरक्षित हैं।
जानकारों का कहना है कि सैन्य सरकार द्वारा कराए जा रहे ये चुनाव न तो स्वतंत्र हैं और न ही निष्पक्ष। उनके मुताबिक, फरवरी 2021 में आंग सान सू चीन की निर्वाचित सरकार के तख्तापलट के बाद सेना अपने शासन को वैध ठहराने की कोशिश कर रही है। संसदीय और विधानसभा चुनावों में 57 दलों के 4,800 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। देशभर में केवल छह दल ऐसे हैं, जो संसदीय चुनाव में सीट हासिल कर सकते हैं।
पहले चरण में सैन्य समर्थित ‘यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी’ (यूएसडीपी) का दबदबा रहा। इस चरण में संसद के निचले सदन की लगभग 90 प्रतिशत सीट पर पार्टी ने जीत हासिल की। इसके अलावा यूएसडीपी ने क्षेत्रीय विधानसभाओं में भी अधिकांश सीट जीतीं। म्यांमा की 80 वर्षीय पूर्व नेता आंग सान सू चीन और उनकी पार्टी इस चुनाव में भाग नहीं ले रही। वह 27 साल की कैद की सजा काट रही हैं। उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) को 2023 में भंग कर दिया गया था, क्योंकि उसने नए सैन्य नियमों के तहत पंजीकरण कराने से इनकार कर दिया था।