सांसद ने डिग्री कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की सेवाएं जारी रखने की उठाई मांग

हर साल नई भर्ती प्रक्रिया पर सांसद ने जताई चिंता
सांसद ने डिग्री कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की सेवाएं जारी रखने की उठाई मांग
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने अंडमान-निकोबार प्रशासन से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026–2027 के लिए द्वीपसमूह के विभिन्न डिग्री कॉलेजों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं की सेवाओं को जारी रखने तथा उनके कार्यकाल को बढ़ाने की मांग की है। सांसद ने जेएनआरएम, एएनसीओएल, एमजी कॉलेज मायाबंदर, बी.एड कॉलेज, डीबीआरएआईटी सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं की समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि इस मुद्दे को पहले भी प्रशासन के समक्ष उठाया गया था। इसके बाद जुलाई 2026 में निर्देश जारी किए गए थे कि शैक्षणिक सत्र 2025–2026 के दौरान योग्य वर्तमान अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए, जिसके परिणामस्वरूप कई व्याख्याताओं को सेवाएं जारी रखने की अनुमति मिली थी। सांसद ने कहा कि इन अतिथि व्याख्याताओं में से कई वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं तथा वे यूजीसी मानकों के अनुरूप योग्यताएं रखते हैं। बार-बार भर्ती प्रक्रिया आयोजित किए जाने की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बिष्णु पद रे ने कहा कि हर वर्ष नए सिरे से पैनल तैयार करने की प्रक्रिया प्रशासनिक देरी का कारण बनती है तथा शैक्षणिक निरंतरता भी प्रभावित होती है। इस संबंध में सांसद ने सुझाव दिया कि इच्छुक तथा संतोषजनक प्रदर्शन करने वाले वर्तमान अतिथि शिक्षकों को बिना हर वर्ष नए आवेदन आमंत्रित किए प्राथमिकता के आधार पर सेवाएं जारी रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नई भर्ती केवल उन पदों के लिए की जाए जहां रिक्तियां बनी रहें या नई आवश्यकता उत्पन्न हो। साथ ही सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में एक समान और पारदर्शी नीति अपनाई जानी चाहिए। सांसद ने यह भी कहा कि लॉ कॉलेज तथा एएनआईआईएमएस जैसे संस्थानों में अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं को अन्य संस्थानों में भी लागू किया जाना चाहिए ताकि स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित हो सके।

सांसद ने मुख्य सचिव, अंडमान-निकोबार प्रशासन से अनुरोध किया है कि छात्रों और द्वीपों की शैक्षणिक व्यवस्था के हित में संबंधित संस्थानों के प्रमुखों को आवश्यक निर्देश जारी कर वर्तमान अतिथि व्याख्याताओं की सेवाओं को शैक्षणिक सत्र 2026–2027 और आगे भी जारी रखा जाए।


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