मोदी का संदेशः अध्यक्ष बदलते हैं, विचार नहीं

पीएम मोदी ने मंच से साफ कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी किसी एक व्यक्ति या पद से नहीं, बल्कि विचार, प्रक्रिया और कार्यकर्ता भावना से चलती है।
मोदी का संदेशः अध्यक्ष बदलते हैं, विचार नहीं
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अंजली भाटिया

नई दिल्लीः बीजेपी मुख्यालय में नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन सिर्फ औपचारिक भाषण नहीं रहा, बल्कि वह संगठन, सत्ता और भविष्य की राजनीति का स्पष्ट रोडमैप था। पीएम मोदी ने मंच से साफ कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी किसी एक व्यक्ति या पद से नहीं, बल्कि विचार, प्रक्रिया और कार्यकर्ता भावना से चलती है। उन्होंने नितिन नवीन को बीजेपी का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि पार्टी में पदभार एक व्यवस्था है, लेकिन कार्यभार जीवनभर की जिम्मेदारी।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा, “जब पार्टी की बात होती है तो नितिन नवीन जी मेरे बॉस हैं और मैं उनका कार्यकर्ता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी में अध्यक्ष बदलते हैं, लेकिन विचार और दिशा नहीं बदलती। उन्होंने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे नेताओं ने अलग-अलग दौर में संगठन को मजबूती दी और पार्टी को आंदोलन से सुशासन के मॉडल तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि देश ने वंशवाद, अस्थिर सरकारों और क्षेत्रीय प्रयोगों का दौर भी देखा है, लेकिन अब भारत बीजेपी के स्थिरता और विकास मॉडल को देख रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि अगले 25 साल देश के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नितिन नवीन इस दौर में बीजेपी की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाएंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि नितिन नवीन की भूमिका केवल बीजेपी तक सीमित नहीं रहने वाली है। उन्होंने कहा कि अब नितिन नवीन पूरे एनडीए के अध्यक्ष हैं और सहयोगी दलों के बीच तालमेल उनकी बड़ी जिम्मेदारी होगी। आने वाले वर्षों में, खासकर 2029 से पहले, गठबंधन को मजबूत और संतुलित बनाए रखना उनकी राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री के बाद मंच संभालते हुए नितिन नवीन ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को अपने हिस्से का पुरुषार्थ, त्याग और तपस्या करनी ही होगी। नितिन नवीन ने युवाओं को सीधे संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के 15 अगस्त 2024 के उस आह्वान की याद दिलाई, जिसमें युवाओं से सार्वजनिक जीवन में आने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा कि राजनीति से दूरी बनाना समाधान नहीं है, बल्कि सक्रिय भागीदारी ही एकमात्र रास्ता है।

उन्होंने कहा, “राजनीति 100 मीटर की रेस नहीं है, यह लंबी मैराथन है। यहां स्पीड का नहीं, स्टैमिना का टेस्ट होता है।” उन्होंने युवाओं को आगाह किया कि राजनीति की पिच पर उतरने से पहले जड़ों को मजबूत करना जरूरी है, तभी लंबी पारी खेली जा सकती है। नए अध्यक्ष ने यह भी साफ किया कि बीजेपी में राजनीति सत्ता पाने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की साधना है।

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