

शिलांग: मेघालय विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने राज्य में अवैध कोयला खनन के मामलों को लेकर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मामलों और उल्लंघनों को एक साथ जोड़कर कार्रवाई की जा रही है, जिससे मामले अदालतों में उलझे रह जाते हैं और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में संगमा ने कहा कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच और सुनवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जब कई मामलों को एक ही कार्यवाही में जोड़ दिया जाता है तो अदालतों के लिए तथ्यों और जिम्मेदारी का निर्धारण करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में जब विधायक अवैध खनन का मुद्दा उठाते हैं तो अक्सर उन्हें यह कहकर जवाब दिया जाता है कि मामला अदालत में विचाराधीन है।
‘पर्याप्त सबूत नहीं’ कहकर बंद हो रहे मामले
संगमा ने आरोप लगाया कि कई मामलों में पहले एफआईआर दर्ज होती है और मामला अदालत तक पहुंचता है, लेकिन बाद में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें यह कहते हुए बंद कर दिया जाता है कि पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न समितियों की रिपोर्टों में राज्य में अवैध गतिविधियों के जारी रहने की जानकारी सामने आती रही है, जबकि जांच एजेंसियां अदालतों में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कहती हैं। संगमा ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में अवैध खनन पर प्रभावी रोक कैसे लगाई जा सकती है। संगमा ने 2018 में दर्ज 32 लाख मीट्रिक टन कोयले की मात्रा पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2014 के खनन प्रतिबंध के बाद सत्यापित सूची में दर्ज पहले से निकाले गए कोयले के परिवहन की अनुमति थी। उनके मुताबिक, उपलब्ध कोयले के परिवहन के बाद करीब 2 लाख मीट्रिक टन कोयला ही बचना चाहिए था, लेकिन 2018 तक यह मात्रा बढ़कर लगभग 32 लाख मीट्रिक टन दर्ज हो गई। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी मात्रा में वृद्धि को किसने मंजूरी दी और इसकी जांच क्यों नहीं हुई।
NGT के स्वतंत्र आयुक्तों ने किया था स्टॉक सत्यापन
संगमा ने दावा किया कि कोयले के स्टॉक की जांच NGT द्वारा नियुक्त स्वतंत्र आयुक्तों ने की थी। उन्होंने कहा कि परिवहन की अनुमति केवल उस कोयले के लिए थी, जो पहले ही निकाला जा चुका था और सत्यापित इन्वेंट्री में दर्ज था। उन्होंने इस आधार पर 2018 में सामने आई 32 लाख MT की मात्रा पर विस्तृत जांच की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वेस्ट जयंतिया हिल्स में व्यक्तिगत स्तर पर जांच के दौरान उन्होंने दर्ज कोयले की मात्रा में अंतर पाया था। उन्होंने कहा कि इस विसंगति की स्वतंत्र जांच के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव एमएस राव से संपर्क किया गया था, लेकिन उनके अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। संगमा ने मामले में कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच को जरूरी बताया। उनका कहना है कि जब तक प्रत्येक मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, अवैध खनन से जुड़े विवादों का समाधान नहीं होगा और न्यायपालिका का समय भी लगातार ऐसे मामलों में खर्च होता रहेगा। मेघालय में अवैध कोयला खनन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय रहा है। पूर्व में भी संगमा अवैध खनन और कोयला परिवहन को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। 2022 में उन्होंने 32 लाख मीट्रिक टन कोयले के स्टॉक को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था।