मेधा पाटकर ने याचिका वापस ली

वी के सक्सेना की मानहानि का मामला
 मेधा पाटकर ने याचिका वापस ली
Published on

नयी दिल्ली : नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने सोमवार को हाई कोर्ट से अपनी वह याचिका वापस ले ली, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना के खिलाफ दायर 25 साल पुराने मानहानि मामले में और भी गवाहों से पूछताछ से इनकार करने संबंधी आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गयी थी। जज एम एम सुंदरेश और जज सतीश चंद्र शर्मा के पीठ ने शुरुआत में कहा था कि इस मामले को बंद कर देना चाहिए।

पीठ हाई कोर्ट के उस निर्देश को दी गयी चुनौती के संबंध में कोई राहत देने के लिए तैयार नहीं थी, जिसमें मेधा पाटकर को वी के सक्सेना के खिलाफ मानहानि की शिकायत के समर्थन में किसी और गवाह से पूछताछ करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। पीठ के मिजाज को भांपते हुए, पाटकर के वकील ने याचिका वापस लेने का फैसला किया। हाई कोर्ट ने पहले मामले में किसी भी नये गवाह को अनुमति न देने संबंधी आदेश को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने मामले में किसी भी नये गवाह को अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि यह केवल विलंब करने की तरकीब है, जिसका उद्देश्य दशकों से चल रहे मामले को और लंबा खींचना है और जहां उनके किसी भी गवाह ने उनके आरोपों को साबित नहीं किया है। सक्सेना के वकील मनिंदर सिंह और वकील गजिंदर कुमार एवं किरण जय ने पीठ को सूचित किया कि मामले की सुनवाई कर रहे कोर्ट में चल रहा मामला अपने अनुसार चलता रहेगा। सक्सेना और पाटकर ने एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मुकदमे दायर किए थे। पाटकर के खिलाफ सक्सेना द्वारा दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को उनकी (पाटकर की) दोषसिद्धि की पुष्टि की थी।

पीठ ने कहा कि वह इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है, जिसमें पाटकर को ‘अच्छे आचरण की परिवीक्षा’ पर रिहा किया गया था, लेकिन उन्हें हर 3 साल में एक बार अदालत में पेश होना अनिवार्य किया गया था। पीठ ने कहा, ‘हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों को ध्यान में रखते हुए, लगाये गए दंड को रद्द किया जाता है और हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि परिवीक्षा आदेश लागू नहीं होगा।’

हाई कोर्ट के 29 जुलाई को पाटकर (70) की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा था। सक्सेना ने यह मामला 25 साल पहले दायर किया था, जब वह गुजरात में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमुख थे। पाटकर ने इस मामले में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि को बरकरार रखने संबंधी 2 अप्रैल के सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।


Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in