‘दुर्गा’ को केरल भेजने पर उठे सवाल, प्रकृति प्रेमियों ने जताई नाराजगी

बांसबारी रेंज के महल कैंप से किया गया स्थानांतरण बिना सार्वजनिक सूचना दिए हाथी भेजने का आरोप
‘दुर्गा’ को केरल भेजने पर उठे सवाल, प्रकृति प्रेमियों ने जताई नाराजगी
Published on

गुवाहाटी : असम के प्रसिद्ध मानस नेशनल पार्क से ‘दुर्गा’ नाम की एक मादा हाथी को केरल भेजे जाने को लेकर स्थानीय प्रकृति प्रेमियों और संरक्षणवादियों में चिंता पैदा हो गई है। प्रकृति प्रेमियों ने हाथी के स्थानांतरण की प्रक्रिया, इसकी परिस्थितियों और इसके बारे में स्थानीय लोगों को जानकारी नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार, दुर्गा को मानस नेशनल पार्क की बांसबारी रेंज के अंतर्गत महल कैंप से 7 सितंबर की रात केरल भेजा गया। हाथी के स्थानांतरण की खबर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है। प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण वन्यजीव स्थानांतरण के संबंध में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए थी।

बिना सार्वजनिक जानकारी दिए हाथी भेजने का आरोप

प्रकृति प्रेमी मनसुख संखारिका ने दुर्गा के स्थानांतरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क प्रबंधन की ओर से हाथी को केरल भेजे जाने के संबंध में स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों को कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई। संखारिका ने सवाल उठाया कि हाथी को किन परिस्थितियों में मानस नेशनल पार्क से बाहर भेजा गया और इस स्थानांतरण के पीछे क्या उद्देश्य था। उन्होंने स्थानांतरण के तरीके को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया और कहा कि वन्यजीवों से जुड़े ऐसे मामलों में अधिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता की आवश्यकता है।

स्थानांतरण के उद्देश्य को लेकर भी सवाल

दुर्गा को केरल भेजे जाने के बाद स्थानीय संरक्षणवादियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसे असम से इतनी दूर क्यों भेजा गया। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थानांतरण के आधिकारिक उद्देश्य और केरल में हाथी को कहां रखा जाएगा, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि किसी हाथी को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करना सामान्य प्रक्रिया नहीं है और इसके पीछे स्पष्ट संरक्षण, पुनर्वास या प्रबंधन संबंधी कारण होना चाहिए। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को स्थानांतरण की वजह और प्रक्रिया के बारे में आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

असम सरकार से हस्तक्षेप की मांग

प्रकृति प्रेमी मनसुख संखारिका ने असम सरकार से मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि मानस नेशनल पार्क से वन्यजीवों के स्थानांतरण से जुड़े मामलों में भविष्य में स्थानीय समुदायों और संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज न किया जाए। उन्होंने कहा कि मानस नेशनल पार्क केवल वन विभाग की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पार्क से जुड़े स्थानीय लोग, प्रकृति प्रेमी और संरक्षणवादी लंबे समय से इसके वन्यजीवों और जैव विविधता के संरक्षण में रुचि रखते हैं। इसलिए ऐसे किसी भी महत्वपूर्ण कदम के संबंध में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।

संरक्षणवादियों की चिंता बढ़ी

दुर्गा के केरल स्थानांतरण की खबर ने स्थानीय संरक्षणवादियों के बीच यह चिंता बढ़ा दी है कि मानस नेशनल पार्क से वन्यजीवों को बाहर भेजने के दौरान किन मानकों और प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। संरक्षणवादियों का कहना है कि वन्यजीवों के स्थानांतरण में उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा के दौरान तनाव और नए वातावरण में अनुकूलन जैसे पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल दुर्गा के स्थानांतरण को लेकर उठे सवालों पर पार्क प्रबंधन या संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। स्थानीय प्रकृति प्रेमी अब उम्मीद कर रहे हैं कि अधिकारियों की ओर से हाथी को केरल भेजने के कारण, प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। दुर्गा का यह स्थानांतरण फिलहाल सिर्फ एक हाथी के एक राज्य से दूसरे राज्य जाने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने वन्यजीव प्रबंधन में पारदर्शिता, स्थानीय भागीदारी और संरक्षण संबंधी फैसलों को लेकर व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in